Rajya Sabha Election Process: राज्यसभा की 2 अप्रैल को खाली होने वाली महाराष्ट्र की 7, तेलंगाना की 2, पश्चिम बंगाल की 5, तमिलनाडु की 6, छत्तीसगढ़ की 2, असम की 3, हिमाचल प्रदेश की एक, बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटें भरने के लिए आज मतदान होगा. इनमें से केवल बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 सीटों के लिए वोटिंग शुरू हो चुकी है, आज शाम को ही मतगणना होगी. बाकी 7 राज्यों की 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाने तय हैं. जानें राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के बारे में?
राज्यसभा चुनाव पर एक नजर
लोकसभा चुनाव में सांसद जनता की ओर से चुना जाता है, जबकि राज्यसभा सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है, यानी कि राज्यसभा सदस्यों का चुनाव सीधे जनता नहीं करती, बल्कि जनता के द्वारा चुने गए प्रतिनिधि राज्यसभा सदस्यों को चुनते हैं. लोकसभा भंग हो सकती है, लेकिन राज्यसभा एक ‘स्थायी सदन’ है. राज्यसभा सदस्य 6 साल के लिए चुने जाते हैं. सदन के एक-तिहाई (1/3) सदस्य हर दो साल में रिटायर हो जाते हैं. इसी कारण हर 2 साल में नए चुनाव या नामांकन प्रक्रिया चलती है. देश में राज्यसभा की कुल 245 सीटें हैं, जिनमें से 233 पर चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं.
कैसे होता है मतदान?
राज्यसभा चुनाव में वोटिंग की प्रक्रिया सामान्य चुनावों से बिल्कुल अलग होती है. उम्मीदवार राज्य के निर्धारित फॉर्म में नामांकन दाखिल करते हैं. जमानत राशि जमा करनी होती है. राज्य के विधायक मतदान करते हैं. यह सीक्रेट मतदान नहीं होता, बल्कि सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली से होता है. मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम के आगे विधायक 1, 2, 3… लिखकर वरीयता देते हैं. विधायकों को अपना बैलेट पेपर अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है. अगर कोई विधायक अपनी पार्टी के अलावा किसी और को वोट देता है तो उसका वोट रद्द तो नहीं होता, लेकिन उस पर पार्टी स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है. इस चुनाव में आज भी बैलेट पेपर का ही इस्तेमाल किया जाता है.
क्या है जीत का जादुई फॉर्मूला?
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत है, यह सीटों की संख्या और विधायकों की संख्या पर निर्भर करता है. यहां एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 मानी जाती है. यह है जीत का फॉर्मूला
(कुल विधायकों की संख्या × 100) ÷ (खाली राज्यसभा सीटें + 1) = जरूरी वोट वैल्यू + 1 (फिर इसे 100 से भाग देकर विधायकों की न्यूनतम संख्या निकालते हैं)
बिहार का उदाहरण देखें, यहां पांच सीटें खाली हैं और कुल विधायक 243 हैं.
गणना: (243 × 100) ÷ (5 + 1) = 24300 ÷ 6 = 4050
क्वोटा = 4050 + 1 = 4051 (यानी हर उम्मीदवार को कम से कम 4051 वैल्यू चाहिए)
एक विधायक की वोट वैल्यू राज्य के नियम से तय होती है, 243 सीटों के हिसाब से यानी एक सीट के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए.
NDA के पास 202 विधायक हैं, वो आसानी से 4-5 सीटें जीत सकते हैं.
वहीं, महागठबंधन ब्लॉक के पास भी सीटों के हिसाब से एक सीट जीतने के चांस हैं, लेकिन NDA मजबूत स्थिति में है.
सीटों का बंटवारा कैसे होता है?
संविधान की चौथी अनुसूची के अनुसार, राज्यसभा सीटों का आवंटन राज्यों की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है. यही कारण है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के पास सबसे अधिक (31) सीटें हैं, जबकि छोटे राज्यों के पास कम सीटें होती हैं.
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