Rajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए चेतावनी दी कि भारत देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले लोगों या ताकतों को कोई महफूज पनाहगाह नहीं देगा. न्यूज 18 के कार्यक्रम में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला एक गंभीर घटना थी और पाकिस्तान ने उस ‘लक्ष्मण रेखा’ को पार कर लिया है जिसे उन्होंने मार्क किया था. उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तानी इलाके से होने वाले दुश्मनी भरी एक्टिविटीज को एक्ट ऑफ वॉर के तौर देखा जाएगा और उनका उचित जवाब दिया जाएगा.
आतंक के खिलाफ बदला भारत का रुख
राजनाथ सिंह ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद आतंकवाद को लेकर भारत के जवाब में काफी बदलाव आया है. रक्षा मंत्री के मुताबिक, देश ‘रणनीतिक रोकथाम’ (Strategic Containment) और ‘इनकार के जरिए रोकथाम’ (Deterrence by Denial) की पुरानी नीतियों से आगे बढ़कर ‘सजा के जरिए रोकथाम’ (Deterrence by Punishment) की तरफ बढ़ गया है. उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर की मिसाल देते हुए भारत की सैन्य क्षमता और खतरों का जवाब देने की उसकी इच्छाशक्ति को प्वॉइंट किया.
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने एक क्लियर मैसेज दिया कि भौगोलिक सीमाएं भारत को आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से नहीं रोकेंगी. उन्होंने कहा, ‘अब आतंकवादियों और उन्हें सपोर्ट करने वालों के बीच कोई फर्क नहीं किया जाएगा.’
‘आर्म्ड फोर्सेज को पूरा सपोर्ट’
रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सुरक्षा चुनौतियों का जवाब देने के लिए आर्म्ड फोर्सेज को ज्यादा ऑपरेशनल फ्रीडम दी गई है. सिंह ने कहा, ‘आज हमने अपने सशस्त्र बलों को खुली छूट दी है. हमारे आर्म्ड फोर्सेज जानते हैं कि राजनीतिक लीडरशिप हर हालात में उनके साथ खड़ा है.’
उन्होंने कहा कि शांति को लेकर भारत की कमिटमेंट को संकल्प की कमी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘भारत सभी देशों के साथ अच्छे पड़ोसी संबंध बनाए रखता है, लेकिन शांति की हमारी इच्छा को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए.’ उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की भारत की क्षमता और डिटरमिनेशन को पहचानना चाहिए.
‘सीमाएं तय हैं, खतरे बदलते रहते हैं’
राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बदलते नेचर पर भी फोकस कियी. उन्होंने कहा कि आज खतरे पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं और इनके लिए एक व्यापक सुरक्षा रणनीति की जरूरत है. सिंह ने कहा, ‘सीमाएं तय हैं, लेकिन खतरों का दायरा बहुत बदलता रहता है.’ उन्होंने तर्क दिया कि उभरती राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को एक हॉलिस्टिक अप्रोच की जरूरत है.
राजनाथ सिंह ने इंडस वाटर ट्रीटी को सस्पेंड करने का भी ज़िक्र किया और कहा कि इस कदम से भारत ने ये मैसेज दिया है कि ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते.’ सिंह ने दोहराया कि भारत अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कदम उठाना जारी रखेगा.