मेघालय के चर्चित हनीमून मर्डर केस में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करने वाली याचिका पर अब अलगी सुनवाई 14 जुलाई को होगी. बता दें कि पति राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर अब SC 14 जुलाई को सुनावाई करेगा.
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने मेघालय सरकार से ‘गिरफ्तारी के आधार’ (grounds of arrest) की कॉपी जमा करने को कहा है, जो कथित तौर पर सोनम रघुवंशी को दी गई थी.
मेघालय की एक अदालत ने सोनम को जमानत दे दी क्योंकि गिरफ्तारी के समय उन्हें ‘गिरफ्तारी का आधार’ नहीं बताया गया था. हालांकि, अभियोजन पक्ष का कहना है कि सोनम को ‘गिरफ्तारी का आधार’ बता दिया गया था.
मेघालय सरकार के अनुसार, एकमात्र मुद्दा यह है कि दस्तावेज में एक टाइपिंग की गलती थी. हत्या के अपराध के लिए सजा का प्रावधान करने वाली भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (1) के बजाय, गलती से धारा 403 (1) का जिक्र हो गया था, जो असल में मौजूद ही नहीं है. अगली सुनवाई में, शीर्ष अदालत विस्तार से इस बात की जांच करेगी कि क्या कानून के अनुसार सोनम को गिरफ्तारी का आधार बताया गया था या नहीं.
सोनम ने हलफनामे में क्या कहा?
सोनम ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि वह ट्रायल में पूरा सहयोग कर रही है और ट्रायल में यदि कोई देरी हुई है तो उसके लिए वह जिम्मेदार नहीं है.
सोनम ने अदालत से यह भी कहा है कि उसे 27 अप्रैल 2026 को जमानत मिली थी और 28 अप्रैल 2026 को उसे जेल से रिहा कर दिया गया था. ऐसे में उसे फिर से जेल भेजने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि जमानत रद्द करने के लिए आवश्यक कानूनी आधार इस मामले में मौजूद नहीं हैं.
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मुझे झूठा फंसाया गया– सोनम रघुवंशी
सोनम ने अपने बचाव में यह भी कहा है कि उसे झूठा फंसाया गया है. बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सोनम बेल पर बाहर आ चुकी है तो वो उसकी जमानत रद्द करने को इच्छुक नहीं है. हालांकि कोर्ट ने सोनम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
सोनम ने पिछली सुनवाई में क्या कहा था?
मिली जानकारी के अनुसार, इससे पहले हुई सुनवाई में राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने दलील दी थी कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील उपलब्ध कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण बताए गए थे. उन्होंने कहा था कि पुलिस ने सिर्फ खाली प्रोफॉर्मा उन्हें दिया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया था कि यदि यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण था तो इसे पहले अदालत के सामने क्यों नहीं रखा गया. कोर्ट ने यह भी पूछा था कि यदि जमानत केवल तकनीकी आधार पर दी गई है तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी करने से रोकता है?
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