लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील की कड़ी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच नागरिकों से अपनी रोजमर्रा की जीवनशैली बदलने को कहा था.

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के इन सुझावों को "नाकामी का सबूत" बताया और कहा कि ये दिखाते हैं कि शासन-प्रशासन ने मुख्य आर्थिक समस्याओं को सुलझाने के बजाय अपनी जिम्मेदारी आम लोगों पर डाल दी है.

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राहुल गांधी ने क्या कहा?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लोगों से कई तरह के त्याग करने को कहा था, जिनमें एक साल तक सोना न खरीदना, विदेश यात्रा से बचना, पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल कम करना और यहां तक कि 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम) करना भी शामिल था.

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उन्होंने कहा कि ये सिर्फ आम सुझाव नहीं हैं, बल्कि शासन की गहरी नाकामी को दिखाते हैं. उनके मुताबिक, इससे पता चलता है कि सालों तक सत्ता में रहने के बाद, सरकार अब नागरिकों को बता रही है कि उन्हें क्या खरीदना है, कहां जाना है और अपनी रोजमर्रा की जिदगी कैसे जीनी है.

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राहुल गांधी ने कहा कि ऊर्जा संकट जैसे मौजूदा वैश्विक संकटों के लिए देश को तैयार करने के बजाय, नेतृत्व लोगों से अपनी जीवनशैली में बदलाव करने को कह रहा है. उन्होंने अपनी इस आलोचना को भी दोहराया कि प्रधानमंत्री एक "समझौतावादी PM" हैं और दावा किया कि ऐसे समय में जब भारत को एक मजबूत आर्थिक दिशा की जरूरत है, तब प्रभावी नेतृत्व की कमी है.

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PM मोदी ने क्या कहा?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ने पर, PM मोदी ने पहले नागरिकों से ईंधन का इस्तेमाल कम करने, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने और अनावश्यक खर्चों से बचने का आग्रह किया था. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कोविड-19 के समय की तरह, घर से काम करने से ईंधन की खपत कम करने में मदद मिल सकती है.

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