कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कार्रवाई पर कड़े सवाल उठाए. इस दौरान राहुल गांधी ने एक महिला प्रदर्शनकारी को मीडिया के सामने लाते हुए ‘हमारी शेरनी’ कहकर मिलवाया. राहुल गांधी ने कहा, “मैं अपनी ‘शेरनी’ से आपको मिलवाना चाहता हूं. उसे पीटा गया, लेकिन वह बिल्कुल नहीं डरी और न ही उसके दिल में कोई नफरत है.” इसके बाद पीड़िता ने हिरासत के दौरान दिल्ली पुलिस की महिला सिपाही द्वारा की गई कथित बर्बरता की पूरी कहानी साझा की. छात्रा ने बताया कि कल NSUI के सभी कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे. इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और तीन बसों में भर दिया.
हर बस में करीब 30 से 40 कार्यकर्ता थे. छात्रा के मुताबिक, जिस बस में वह मौजूद थी, उसमें दो लड़कियां और 20-30 अन्य साथी थे. उसी बस में चंचल यादव नाम की एक महिला कॉन्स्टेबल भी मौजूद थी.
‘गला दबाकर सीट पर पटका, चेहरे को नाखूनों से नोचा’
छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने के बाद जब वे बस के गेट से नीचे उतरकर दोबारा प्रदर्शन जारी रखने की कोशिश कर रहे थे, तभी घटना हुई. छात्रा ने कहा, “हमने बस को रोकने के लिए उसके नीचे बैठकर विरोध जारी रखना चाहा. तभी महिला सिपाही चंचल यादव ने मेरी गर्दन को जोर से पकड़ लिया और धक्का दे दिया, जिससे मैं पीछे सीट पर गिर गई.”छात्रा का दावा है कि इसके बाद सिपाही ने अपने नाखूनों से उसके चेहरे और कान के पास बुरी तरह खरोंच दिया. जब उसने इस ज्यादती का विरोध किया, तो सिपाही ने उसे जोरदार थप्पड़ मारा और कहा, “ये लो, अपने मुंह पर एक और थप्पड़ खाओ.” प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों ने पुलिस हिरासत के दौरान हुए दुर्व्यवहार को लेकर गहरा रोष जताया. वहीं, राहुल गांधी ने छात्रों के साहस की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने वालों पर इस तरह का बर्ताव स्वीकार्य नहीं है. इस मामले पर अभी तक पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
‘पिछली बार एक छात्र की आंख गई, अब छात्रा का कान’
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “केरल की रहने वाली आथिरा के एक कान की सुनने की क्षमता चली गई है. उस कान पर मारे जाने की वजह से वह अब एक कान से बहरी हो चुकी है और कुछ भी नहीं सुन पा रही है. पिछली बार मैंने आपको एक लड़का दिखाया था, जिसकी आंख की रोशनी चली गई थी और अब यह छात्रा एक कान से सुनने में असमर्थ हो गई है.”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छात्रा आथिरा ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया, “मैं केरल से हूं और दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही हूं. कल जब पुलिस ने हमें हिरासत में लिया तो जिस बस में हमें बैठाया गया, उसमें एक भी महिला पुलिस अधिकारी या महिला कॉन्स्टेबल मौजूद नहीं थी. इसलिए मैंने बस इतना पूछा कि महिला पुलिस अधिकारी कहां हैं? क्योंकि अगर वे महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रहे हैं, तो नियमों के तहत कम से कम एक महिला कॉन्स्टेबल का होना जरूरी है.” आथिरा ने आगे आरोप लगाया, “इसके बाद बस आगे बढ़ी और कनॉट प्लेस थाने के सामने जाकर रुकी. वहां उन्होंने लगातार मेरे पूरे गाल पर मारा. इस बेरहमी की वजह से मेरी आंख में गंभीर चोट आई है और मेरे कान को भारी नुकसान पहुंचा है.” छात्रा के इन आरोपों को लेकर राहुल गांधी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए और निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग दोहराई है.
पीड़ित छात्रों की बातें सुनने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि यह हिंदुस्तान की आवाज है, जिसे दबाया नहीं जा सकता. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे ऐसे पुलिस एक्शन के वीडियो जरूर बनाएं. राहुल गांधी ने कहा कि पुख्ता सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी और ज्ञानेश कुमार समेत जिनको भी सजा देनी होगी, उन्हें कानूनन सजा जरूर मिलेगी. गौरतलब है कि छात्रों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर फिलहाल पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है.