'गला दबाया, चेहरे को नाखूनों से नोचा', राहुल गांधी ने NSUI छात्रा को बताया 'शेरनी', महिला सिपाही पर पिटाई का गंभीर आरोप

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई NSUI की छात्रा ने महिला पुलिसकर्मी पर मारपीट और टॉर्चर के गंभीर आरोप लगाए हैं. राहुल गांधी ने छात्रा को ‘हमारी शेरनी’ बताते हुए कहा कि उसे पीटा गया, लेकिन वह डरी नहीं. छात्रा ने आरोप लगाया कि महिला सिपाही ने उसका गला दबाया, चेहरे को नोंचा और थप्पड़ मारे.

Rahul Gandhi press conference, NSUI protest, allegations of police torture

राहुल गांधी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI छात्रों ने आपबीती सुनाते हुए पुलिस पर लाठीचार्ज और मारपीट का दावा किया. Credit: PTI

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कार्रवाई पर कड़े सवाल उठाए. इस दौरान राहुल गांधी ने एक महिला प्रदर्शनकारी को मीडिया के सामने लाते हुए ‘हमारी शेरनी’ कहकर मिलवाया. राहुल गांधी ने कहा, “मैं अपनी ‘शेरनी’ से आपको मिलवाना चाहता हूं. उसे पीटा गया, लेकिन वह बिल्कुल नहीं डरी और न ही उसके दिल में कोई नफरत है.” इसके बाद पीड़िता ने हिरासत के दौरान दिल्ली पुलिस की महिला सिपाही द्वारा की गई कथित बर्बरता की पूरी कहानी साझा की. छात्रा ने बताया कि कल NSUI के सभी कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे. इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और तीन बसों में भर दिया.

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हर बस में करीब 30 से 40 कार्यकर्ता थे. छात्रा के मुताबिक, जिस बस में वह मौजूद थी, उसमें दो लड़कियां और 20-30 अन्य साथी थे. उसी बस में चंचल यादव नाम की एक महिला कॉन्स्टेबल भी मौजूद थी.

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‘गला दबाकर सीट पर पटका, चेहरे को नाखूनों से नोचा’

छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने के बाद जब वे बस के गेट से नीचे उतरकर दोबारा प्रदर्शन जारी रखने की कोशिश कर रहे थे, तभी घटना हुई. छात्रा ने कहा, “हमने बस को रोकने के लिए उसके नीचे बैठकर विरोध जारी रखना चाहा. तभी महिला सिपाही चंचल यादव ने मेरी गर्दन को जोर से पकड़ लिया और धक्का दे दिया, जिससे मैं पीछे सीट पर गिर गई.”छात्रा का दावा है कि इसके बाद सिपाही ने अपने नाखूनों से उसके चेहरे और कान के पास बुरी तरह खरोंच दिया. जब उसने इस ज्यादती का विरोध किया, तो सिपाही ने उसे जोरदार थप्पड़ मारा और कहा, “ये लो, अपने मुंह पर एक और थप्पड़ खाओ.” प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों ने पुलिस हिरासत के दौरान हुए दुर्व्यवहार को लेकर गहरा रोष जताया. वहीं, राहुल गांधी ने छात्रों के साहस की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने वालों पर इस तरह का बर्ताव स्वीकार्य नहीं है. इस मामले पर अभी तक पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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‘पिछली बार एक छात्र की आंख गई, अब छात्रा का कान’

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “केरल की रहने वाली आथिरा के एक कान की सुनने की क्षमता चली गई है. उस कान पर मारे जाने की वजह से वह अब एक कान से बहरी हो चुकी है और कुछ भी नहीं सुन पा रही है. पिछली बार मैंने आपको एक लड़का दिखाया था, जिसकी आंख की रोशनी चली गई थी और अब यह छात्रा एक कान से सुनने में असमर्थ हो गई है.”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छात्रा आथिरा ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया, “मैं केरल से हूं और दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही हूं. कल जब पुलिस ने हमें हिरासत में लिया तो जिस बस में हमें बैठाया गया, उसमें एक भी महिला पुलिस अधिकारी या महिला कॉन्स्टेबल मौजूद नहीं थी. इसलिए मैंने बस इतना पूछा कि महिला पुलिस अधिकारी कहां हैं? क्योंकि अगर वे महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रहे हैं, तो नियमों के तहत कम से कम एक महिला कॉन्स्टेबल का होना जरूरी है.” आथिरा ने आगे आरोप लगाया, “इसके बाद बस आगे बढ़ी और कनॉट प्लेस थाने के सामने जाकर रुकी. वहां उन्होंने लगातार मेरे पूरे गाल पर मारा. इस बेरहमी की वजह से मेरी आंख में गंभीर चोट आई है और मेरे कान को भारी नुकसान पहुंचा है.” छात्रा के इन आरोपों को लेकर राहुल गांधी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए और निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग दोहराई है.

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पीड़ित छात्रों की बातें सुनने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि यह हिंदुस्तान की आवाज है, जिसे दबाया नहीं जा सकता. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे ऐसे पुलिस एक्शन के वीडियो जरूर बनाएं. राहुल गांधी ने कहा कि पुख्ता सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी और ज्ञानेश कुमार समेत जिनको भी सजा देनी होगी, उन्हें कानूनन सजा जरूर मिलेगी. गौरतलब है कि छात्रों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर फिलहाल पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है.

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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