Raghav Chadha said BJP is doing propaganda against me
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नई दिल्ली: चयन समिति में प्रस्तावित सदस्यों के गलत हस्ताक्षर का आरोप लगा रही भाजपा को आम आदमी पार्टी ने आडे हाथ लिया। ‘‘आप’’ के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने सभी आरोपों को निराधार बताया और भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि वो कागज दिखाए, जिस पर गलत हस्ताक्षर हुए।
किसी के हस्ताक्षर भी नहीं लिए गए
राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने आगे कहा कि उन्होंने रूल बुक का हवाला देते हुए कहा कि चयन समिति में प्रस्तावित सदस्यों के हस्ताक्षर की कोई जरूरत ही नहीं है और किसी के हस्ताक्षर भी नहीं लिए गए। ऐसे में गलत हस्ताक्षर की बात कहां से आ गई? भाजपा मेरी छवि खराब करने के लिए मेरे खिलाफ निराधार दुष्प्रचार कर रही है।
एक 34 साल के युवा सांसद ने इनके बड़े नेताओं को ललकारा
राज्यसभा सदस्य ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी, मोरारजी देसाई और मनमोहन सिंह समेत देश के कई बड़े नेताओं के खिलाफ विशेषाधिकार समिति ने कार्रवाई शुरू की। अब इसमें मेरा भी नाम आया है। मैं गर्व से समिति के सामने अपनी बात रखूंगा।
किसी भी सदस्य द्वारा किसी भी सदस्य का नाम प्रस्तावित किया जा सकता है
उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी अफवाह कंपनी भाजपा के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में झूठ बोला कि गलत हस्ताक्षर हो गया। अमित शाह जी देश के दूसरे नंबर के मंत्री है। उनको सदन की कार्रवाई के बारे में समान्य ज्ञान की जानकारी होनी चाहिए। चयन समिति में किसी भी सदस्य द्वारा किसी भी सदस्य का नाम प्रस्तावित किया जा सकता है और उसके हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होती है। दअरसल, मोदी सरकार का एकमात्र मकसद राहुल गांधी की तरह राघव चड्ढा की भी सदस्यता खत्म करनी है। लेकिन हम लड़ना और जीतना जानते हैं। अगर गलत हथकंडे अपनाकर राघव चड्ढा की सदस्यता खत्म की गई तो वो दोबारा भी चुन कर आ जाएंगे। लेकिन अमित शाह जी को झूठ और अफवाह नहीं फैलानी चाहिए।
इस मंत्र के तहत भाजपा ने मेरे खिलाफ दुष्प्रचार शुरू किया
सांसद राघव चड्ढा ने पूरे मामले की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि भाजपा का मूलमंत्र है कि एक झूठ को हजार बार बोलो ताकि वो सच्चाई में तब्दील हो जाए। इस मंत्र के तहत भाजपा ने मेरे खिलाफ दुष्प्रचार शुरू किया गया है। अमूमन ये देखा जाता है कि जब भी किसी सदस्य के खिलाफ विशेषाधिकार समिति कोई कार्रवाई शुरू करती है तो वो सदस्य उस पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं देता है। लेकिन मुझे मजबूरन भाजपा के झूठ का पर्दाफाश करने के लिए देश के सामने आना पड़ा।
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प्रस्तावित किसी सदस्य का नाम देने के लिए लिखित सहमति या हस्ताक्षर चाहिए
राघव चड्ढा ने रूल बुक का हवाला देते हुए कहा कि रूल बुक के अनुसार राज्यसभा संचालित होती है। रूल बुक में लिखा है कि किसी भी चयन समिति के गठन के लिए कोई भी सांसद नाम प्रस्तावित कर सकता है और जिस सदस्य का नाम प्रस्तावित किया जाता है, उसके हस्ताक्षर और लिखित सहमति की जरूरत नहीं होती है। रूल बुक में कहीं पर भी नहीं लिखा है कि चयन समिति में प्रस्तावित किसी सदस्य का नाम देने के लिए लिखित सहमति या हस्ताक्षर चाहिए। इसके बावजूद भाजपा द्वारा एक झूठा प्रचार फैलाया गया कि गलत हस्ताक्षर हो गया।
जब कोई हस्ताक्षर होता ही नहीं है तो गलत हस्ताक्षर की बात कहां से आ गई?
सांसद राघव चड्ढा ने आगे कहा कि जब भी चयन समिति के गठन के लिए नाम प्रस्तावित किए जाते हैं तो न तो उस सदस्य के हस्ताक्षर लिए जाते हैं और न तो हस्ताक्षर जमा किए जाते हैं। हस्ताक्षर की जरूरत ही नहीं होती है। मैंने किसी सदस्य का हस्ताक्षर नहीं लिया और न हस्ताक्षर जमा ही किया। इसके बाद भी गलत हस्ताक्षर की अफवाह फैलाई जा रही है। ये अफवाह सरासर झूठ और बेबुनियाद है। मैं भाजपा के नेताओं को चुनौती देता हूं कि वो कागज दिखाएं जिस पर ये गलत हस्ताक्षर हैं। जब कोई हस्ताक्षर होता ही नहीं है तो गलत हस्ताक्षर की बात कहां से आ गई?