Ragging in Medical College: देशभर में डाॅक्टर कुछ दिनों पहले तक कोलकाता आरजी कर मेडिकल काॅलेज में डाॅक्टर रेप और हत्या के मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांग थी कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की जाए। इस बीच मेडिकल काॅलेज में एडमिशन लेने वाले नए छात्रों को उनके सीनियर रैगिंग के नाम पर क्या-क्या करवाते हैं? यह जानकर आप भी चैंक जाएंगे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल काॅलेज में नया दाखिला लेने वालों छात्रों से उनके सीनियर अश्लील किताबों की कहानियों को जोर-जोर से पढ़ने और याद करने के लिए मजबूर करते हैं।
इन कहानियों में महिलाओं के खिलाफ की गई यौन हिंसा की तारीफ की गई होती है। इनमें कई कहानियां तो उन महिला नर्सों की होती हैं जो उनके साथ काम करती हैं। सीनियर डाॅक्टर नया दाखिला लेने वाले छात्रों को मेडिकल साहित्य और व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम जैसी किताबे देते हैं और उन्हें याद करने के लिए कहते हैं। ऐसे में सीनियर डाॅक्टर इन नए छात्रों को सभी उम्र की महिलाओं को सेक्स ऑब्जेक्ट के तौर पर देखने के लिए मोटिवेट करते हैं। कुछ बड़े शब्दों को शाॅर्ट फाॅरमेट लिखकर उन्हें पढ़ने के लिए कहा जाता है। हालांकि ये शब्द ऐसे हैं जिन्हें यहां पर नहीं लिखा जा सकता है।
वल्गर किताबों में क्या-क्या होता है?
टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार नए छात्रों ने बताया कि उन्हें अश्लील किताबे जोर से पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता है। इस दौरान अगर वे अटक जाते हैं तो सीनियर पहले हंसते हैं और फिर दोबारा पढ़ने को कहते हैं। इतना ही नहीं शवों के साथ भी अमानवीयता वाली बातें शामिल होती है। महिला के स्तन के विकास की तुलना फलों और सब्जियों के साथ की जाती है। इसके अलावा किताब में नर्सों को डाॅक्टरों के लिए हमेशा शारीरिक संबंध बनाने के लिए तड़पते हुए दिखाया गया है।
बलात्कार संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा
इस रिपोर्ट को लेकर ब्लैंक नाॅइज की संस्थापक जसमीन पथेजा ने टाइम्स को बताया कि इन सब चीजों के कारण ही बलात्कार संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं एक वरिष्ठ महिला डाॅक्टर ने कहा कि ऑपरेशन टेबल पर बेहोश पड़े मरीजों के शरीर के बारे में मजाक करना सबसे घटिया काम है, जोकि मैंने पुरुष एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और सर्जनों को करते देखा है। इस तरह की ग्रूमिंग से ऐसे डॉक्टर बनते हैं जो ऐसी चीज़ें करते हैं।