Union Cabinet resolution: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरकार के मुखिया के रूप में 25 वर्षों की निरंतर और सफल सेवा पूरी करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है. कैबिनेट ने इसके लिए एक विशेष प्रस्ताव पारित किया, जिसमें गुजरात से लेकर केंद्र तक उनकी विकास यात्रा के प्रमुख आयामों को रेखांकित किया गया. प्रस्ताव में कहा गया कि गुजरात में तीन बार भारी जनादेश और लोकसभा चुनावों में लगातार तीन बार का जनसमर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जनता के अटूट और निरंतर विश्वास को दर्शाता है. मंत्रिमंडल के इस प्रस्ताव में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल से लेकर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनके नेतृत्व को जोड़ने वाली विकास की इस अटूट कड़ी के 10 प्रमुख आयामों को रेखांकित किया है..
गुजरात की सफल नीतियां बनीं राष्ट्रीय मॉडल
- कैबिनेट के अनुसार, पीएम मोदी ने गुजरात की कई सफल पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया. गुजरात में जनसुनवाई के लिए शुरू की गई ‘स्वागत’ प्रणाली की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर ‘प्रगति’ प्लेटफॉर्म बनाया गया, जिसने रुकी हुई परियोजनाओं को गति दी. इसी तरह कृषि बिजली के लिए शुरू हुई ‘ज्योतिग्राम’ योजना देश भर के लिए मार्गदर्शक बनी.
मां के संघर्षों से सीखी गरीबी की सच्चाई
- प्रधानमंत्री मोदी ने बचपन में अपनी माताजी के संघर्षों को बहुत करीब से देखा था. इसके अलावा, अपने जीवन के शुरुआती दिनों में देश भर की यात्राओं के दौरान वे अभावों और आम जनता की तकलीफों से सीधे रूबरू हुए. इसी जमीनी अनुभव ने उनके भीतर गरीबों के प्रति एक गहरी संवेदनशीलता पैदा की, जो आगे चलकर देश की बड़ी राष्ट्रीय नीतियों का आधार बनी. गरीबी के इसी दर्द को समझते हुए केंद्र सरकार ने गरीबों को केवल राहत देने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर और गरिमापूर्ण जीवन देने पर जोर दिया. इसके तहत आवास, पीने का साफ पानी, बैंकिंग सेवाएं और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई बड़े स्तर के कार्यक्रम शुरू किए गए. लगभग 60 करोड़ जन धन खाते, 4 करोड़ से अधिक पक्के मकान और 25 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर निकलना यह दिखाता है कि कैसे व्यक्तिगत अनुभव ने व्यापक जन-कल्याणकारी रूप लेकर देश के करोड़ों परिवारों को गरिमामय जीवन दिया.
हर वर्ग को मिला आगे बढ़ने का मौका
- कैबिनेट प्रस्ताव के अनुसार, सरकार ने लोगों को केवल राहत देने के बजाय उन्हें अपना भविष्य खुद संवारने के काबिल बनाया है. लगभग 3.5 करोड़ महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर आर्थिक रूप से मजबूत हुईं. वहीं ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए महिलाओं के लिए आरक्षण पक्का किया गया.’पीएम-किसान’ योजना के जरिए किसानों के बैंक खातों में ₹4 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि सीधे भेजी गई. स्टार्टअप्स, कौशल विकास और शिक्षा में सुधार कर युवाओं के लिए नए रास्ते खोले गए. ‘पीएम-जनमन’ योजना से उन कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) तक विकास पहुंचाया गया, जो दशकों से मुख्यधारा से कटे हुए थे.
कड़े और बड़े सुधारों से नहीं हटे पीछे
- प्रस्ताव में रेखांकित किया गया कि पीएम मोदी ने राजनीतिक नफा-नुकसान की चिंता किए बिना देशहित में बड़े सुधार लागू किए. जीएसटी (GST) को जमीन पर उतारना, सरकारी योजनाओं के लाभ का सीधा वितरण और अंग्रेजों के जमाने के पुराने कानूनों को बदलना उनकी मजबूत इच्छाशक्ति को दर्शाता है. स्वच्छता अभियान, डिजिटल पेमेंट और लोकल सामानों को बढ़ावा देकर आम जनता को सीधे राष्ट्र निर्माण से जोड़ा गया.
इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा उछाल
- देश में बुनियादी ढांचे और मैन्युफैक्चरिंग को नई ऊंचाई मिली है. सरकार का पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) ₹2 लाख करोड़ से बढ़कर ₹12 लाख करोड़ से अधिक हो गया, जिससे देश में हाइवे और रेलवे के विद्युतीकरण का काम तेजी से हुआ. साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹2 लाख करोड़ से बढ़कर ₹13 लाख करोड़ के पार पहुंच गया. रक्षा उत्पादन और सेमीकंडक्टर निर्माण में आई तेजी ने देश में आत्मनिर्भर भारत की नींव को पूरी तरह पक्का कर दिया है.
तकनीक से बदली आम आदमी की जिंदगी
- कैबिनेट प्रस्ताव के मुताबिक, सरकार ने तकनीक को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर सीधे आम जनता की सेवा से जोड़ा है. जन धन, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी (JAM) ने सरकारी योजनाओं के पैसे को बिना किसी बिचौलिए के सीधे गरीबों के खातों में पहुंचाया. वहीं, यूपीआई (UPI) ने देश की लेन-देन व्यवस्था को पूरी तरह बदलकर रख दिया.
- भारत ने खुद अपनी कोविड वैक्सीन बनाई और चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतारकर दुनिया में अपनी वैज्ञानिक क्षमता का लोहा मनवाया. अंतरिक्ष क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों को जोड़ने के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम और बायोटेक्नोलॉजी पर तेजी से काम हो रहा है.
संकट के समय देश को दी सही दिशा
- वैश्विक उथल-पुथल और मुश्किल समय में भारत को सही दिशा देने की प्रधानमंत्री की क्षमता को प्रस्ताव में प्रमुखता से उभारा गया. कोविड महामारी के दौरान उन्होंने देश को एकजुट किया, घरेलू टीकों के विकास को गति दी और रिकॉर्ड गति से टीकाकरण अभियान चलाया. पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद समय पर लिए पीएम मोदी के फैसलों से देश की ऊर्जा सुरक्षा सुरक्षित रही और दुनिया भर में मची उथल-पुथल का असर भारत पर नहीं पड़ा.
राष्ट्रीय सुरक्षा में सख्त सीमाएं और ऐतिहासिक कदम
- सुरक्षा के मोर्चे पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किसी भी तरह का समझौता न करने की नीति अपनाई गई. साल 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक और 2025 का ऑपरेशन सिंदूर भारत की आक्रामक और मजबूत सुरक्षा नीति का बड़ा प्रमाण बने. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाना, सेना के लिए वन रैंक वन पेंशन (OROP) लागू करना और तीनों सेनाओं में तालमेल के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) पद बनाना ऐतिहासिक कदम रहे. साथ ही वामपंथी उग्रवाद पर लगाम लगाने और पूर्वोत्तर में शांति बहाल करने से जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है.
दुनिया में बनी भारत की मजबूत पहचान
- कैबिनेट प्रस्ताव में बताया गया है कि पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी मतभेदों को भुलाकर देशों को साथ लाने का काम किया. भारत ने जी-20 और ब्रिक्स जैसे बड़े सम्मेलनों में आम सहमति बनाई. इतना ही नहीं, अफ्रीकी संघ को जी-20 की स्थायी सदस्यता दिलाकर कमजोर और विकासशील देशों को बड़ा मंच दिया. ‘वैक्सीन मैत्री’ अभियान के तहत संकट के समय दुनिया भर के देशों को दवाएं और टीके पहुंचाकर भारत ने यह साबित किया कि उसकी तरक्की पूरी मानवता की भलाई के लिए है. दुनिया के 36 देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है, जो नए और उभरते भारत के प्रति अंतरराष्ट्रीय जगत के गहरे आदर को दिखाता है.
सांस्कृतिक गौरव और पर्यावरण का तालमेल
- प्रधानमंत्री के विजन में आधुनिक तरक्की के साथ-साथ अपनी संस्कृति और प्रकृति की सुरक्षा भी शामिल है. गुजरात में अलग क्लाइमेट चेंज विभाग बनाने की शुरुआत से लेकर आज राष्ट्रीय स्तर पर सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी का तेजी से विस्तार किया गया है. योग का वैश्विक प्रसार, मोटे अनाज (मिलेट्स) को प्रोत्साहन, काशी विश्वनाथ धाम का पुनरुद्धार और अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा ने देश को अपनी सांस्कृतिक विरासत से मजबूती से जोड़ा.
मंत्रिमंडल का यह प्रस्ताव वर्ष 2047 तक एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों के उनके विजन के प्रति नए संकल्प के साथ संपन्न हुआ.
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