प्रधानमंत्री मोदी ने आज 80वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प दोहराए. उन्होंने कहा कि आज सभी देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं और आज ग्लोबलाइजेशन की बात कोई नहीं करता, क्योंकि आज की दुनिया अपने संसाधनों को वेपनाइज्ड करने लगी है, यानी हथियारीकरण होने लगा है, जिससे एनर्जी संकट खड़े हुए. पिछले एक दशक में भारत ने खुद कोरोना महामारी और मिडिल ईस्ट में तेल-गैस के संकट से खुद को उबारा हो, इसी तरह अब देश को एनर्जी, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, कूड ऑयल और सेमीकंडक्टर चिप्स के मामले में भी आत्मनिर्भर बनाना होगा.
रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए कॉरिडोर बना रहा भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए चीन-ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों पर निर्भर है. रेयर अर्थ एलिमेंट्स या क्रिटिकल मिनरल्स पर 90 फीसदी से ज्यादा चीन का कंट्रोल है. चीन और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों से भारत रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर चर्चा और डील कर रहा है, ताकि इस मामले में भारत अपने हित की सुरक्षा कर सके. भारत को रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए कॉरिडोर की जरूरत है. इसके लिए भारत प्रयास कर रहा है, इसलिए अब दुनिया के देश भारत पर विश्वास करने लगे हैं.
2047 तक भारत को न्यूक्लियर पावर बनाने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत को न्यूक्लियर पावर बनाने का है. इसके लिए परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तहत 100 गीगावॉट पॉवर जनरेट करना होगा. 12 वर्ष पहले सोलर एनर्जी की कैपिसिटी 2 गीगावाट थी, जो आज 160 गीगावाट हो चुकी है. परमाणु ऊर्जा सुरक्षा का एक प्रमुख साधन है. संसद में ‘शांति अधिनियम’ पारित करके परमाणु शक्ति बनने के लक्ष्य की ओर मार्ग प्रशस्त किया है. 2047 तक हम 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य तय करेंगे. 10 साल के अंदर 5 नए परमाणु रिएक्टर चालू करेंगे. इस वर्ष परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है.
‘मौके की तलाश में है दिमागी नक्सल’, PM मोदी ने लाल किले से किसे दी चेतावनी; युवाओं के लिए जताई चिंता
समुद्र मंथन से कच्चे तेल में आत्मनिर्भर बनेगा भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत कच्चे तेल के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकते. कोई भी राष्ट्र संसाधनों की कमी से नहीं रुकता, लेकिन अपनी सोच की सीमाओं से बाधित होता है. जब सोच स्थिर हो जाती है और सीमाओं में सिमट जाती है तो हम अपनी वास्तविक क्षमता को पहचानने में विफल हो जाते हैं. इसी सोच के कारण हमारी 99% तटरेखा को ‘नो-गो एरिया’ घोषित कर दिया गया था. समुद्र की गहराई में खोज न करने का निर्णय लिया था. लेकिन हमने ‘नो-गो जोन’ को ‘गो-अहेड जोन’ बना दिया है. गहरे समुद्र की खोज करके कच्चे तेल के नए भंडारों की खोज में लगे हैं. पिछले साल ‘समुद्र मंथन’ पहल की घोषणा की थी और हाल ही में हमने इस उद्देश्य के लिए 85000 करोड़ रुपये आवंटित करके काम में तेजी लाने का निर्णय लिया है.
10 साल में 5 नए सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने का उद्देश्य
लाल किले प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज के डिजिटल और टेक्नोलॉजी के युग में चिप्स बेहद जरूरी हैं. मोबाइल, स्मार्टफोन, गैजेट्स, इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स, मेडिकल इंस्ट्रूमेंट, ट्रांसपोर्ट सिस्टम चिप्स के बिना ठप हैं. भारत इस सेक्टर में भी आत्मनिर्भरता बनने की ओर अग्रसर है. देश में 3 प्रमुख सेमीकंडक्टर प्लांट लग चुके हैं और मुझे पता चला है कि इन प्लांट से निर्यात के लिए उत्पादन शुरू हो चुका है. आने वाले 10 साल में 5 से 8 सेमीकंडक्टर प्लांट उत्पादन शुरू करने वाले हैं.
संबंधित खबरें
सरकार पर संकट! NC में कलह के बीच नाराज विधायकों से मिले उमर-फारूक अब्दुल्ला
4 mins agoSIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का एक और फैसला, स्टाफ के काम की होगी निगरानी
1 hr agoनदी में कूदी महिला को मगरमच्छ ने काटा, पुलिस ने बचाया
2 hrs agoधीरेंद्र शास्त्री को झटका, विवादित टिप्पणी मामले में मानहानि केस दर्ज
2 hrs agoNDPS-UAPA जैसे कानून भी संविधान से ऊपर नहीं, शीघ्र सुनवाई पर SC की टिप्पणी
3 hrs ago7 हत्याओं से दहला बेंगलुरु, ड्राइवर ने पत्नी समेत 7 ससुरालियों की ली जान
4 hrs agoUPSC मेन्स परीक्षा का रिजल्ट जारी, direct link से डाउनलोड करें रिजल्ट PDF
5 hrs agoLIVE: असम के डिब्रूगढ़ में ऑयल इंडिया के टैंक फार्म में लगी आग, एक की मौत
6 hrs agoहोटल से अस्पताल तक आधार की फोटोकॉपी का झंझट खत्म, UIDAI का नया नियम लागू
6 hrs agoदुश्मन के खेमे में मचेगी 'प्रलय'! क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण
13 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines