प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) बिल के लोकसभा में पास नहीं हो पाने के बाद राष्ट्र के नाम संबोधन में अपनी बात रखीं. उन्होंने बिल के समर्थन, विपक्ष के रुख और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की.
- प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही बिल के पक्ष में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका, लेकिन उन्हें देश की महिलाओं का व्यापक समर्थन प्राप्त है.
- उन्होंने आरोप लगाया कि बिल गिरने के दौरान विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया महिलाओं के सम्मान के विपरीत थी और इसे उन्होंने महिलाओं के आत्मसम्मान से जोड़ा.
- प्रधानमंत्री के अनुसार, नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है और इसका उद्देश्य देश के सभी राज्यों में समान प्रतिनिधित्व और अवसर सुनिश्चित करना था.
- उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस प्रयास को विफल किया और कड़े शब्दों में इसकी आलोचना की.
- प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों के भीतर यह आशंका है कि महिलाओं के सशक्त होने से उनकी पारंपरिक नेतृत्व संरचनाएं प्रभावित हो सकती हैं.
- उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बदलावों में किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व में कमी नहीं होती, बल्कि सभी राज्यों की सीटों में समान अनुपात में वृद्धि का प्रावधान था.
- प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को 'एंटी-रिफॉर्म' बताते हुए आरोप लगाया कि पार्टी महत्वपूर्ण सुधारों में बाधा डालती रही है.
- उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा राजनीतिक श्रेय का नहीं, बल्कि महिलाओं को उनका अधिकार देने का है, और वे इसके लिए श्रेय विपक्ष को देने को भी तैयार थे.
- प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए प्रयास जारी रखेगी.
- उन्होंने कहा कि जो दल इस संशोधन के विरोध में हैं, वे महिलाओं के समर्थन को हल्के में ले रहे हैं और देश की महिलाएं इस पूरे घटनाक्रम को देख रही हैं.
बता दें, लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण से संबंधित संविधान (131वां संशोधन) बिल आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका. बिल में लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 से देने का प्रस्ताव शामिल था.
---विज्ञापन---
---विज्ञापन---