Petrol Diesel Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ समय में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद ब्रेंट क्रूड के दाम काफी नीचे आ गए हैं. लेकिन इस गिरावट के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं की जेब को अब तक कोई राहत नहीं मिली है और देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम पुराने स्तर पर ही स्थिर हैं. ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल है कि जब कच्चा तेल सस्ता हो रहा है तो हमारे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं घट रहे? आइए इसके पीछे का पूरा गणित और सरकार का तर्क समझते हैं.

---विज्ञापन---

  1. पुरानी घाटे की भरपाई कर रही हैं तेल कंपनियां (OMCs)

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, जब पिछले महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, तब सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने आम जनता को महंगाई के बड़े झटके से बचाने के लिए घरेलू कीमतों में उस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं की थी. तेल कंपनियों ने भारी 'अंडर रिकवरी' (नुकसान) झेली थी. अब जब कच्चा तेल सस्ता हुआ है, तो कंपनियां पहले अपने उस पुराने घाटे की भरपाई कर रही हैं.

---विज्ञापन---

  1. रिफाइनरी तक सस्ता तेल पहुंचने में लगता है समय

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटते ही उसे तुरंत घरेलू बाजार में लागू नहीं किया जा सकता. जो कच्चा तेल आज सस्ता हुआ है, उसे जहाजों के जरिए भारत आने, रिफाइनरी में प्रोसेस होने और पेट्रोल पंपों तक पहुंचने में करीब 30 से 45 दिनों का समय लगता है. रूटिंग और शिपिंग में लगने वाले इस समय (Lag Time) के कारण भी तुरंत राहत नहीं मिलती.

---विज्ञापन---

  1. भारी-भरकम टैक्स और डॉलर का असर

भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसका भुगतान डॉलर में होता है. अगर डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो कच्चा तेल सस्ता होने के बाद भी उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता. इसके अलावा, हमारे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों का एक बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों के वैट (VAT) के रूप में जाता है. जब तक टैक्स के इस ढांचे में कटौती नहीं होगी, तब तक रिटेल कीमतों में बड़ी गिरावट देखना मुश्किल है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक इसी तरह कम बनी रहती हैं, तो आने वाले हफ्तों में तेल कंपनियां आम जनता को राहत देने का फैसला कर सकती हैं.

---विज्ञापन---