परिवहन, पर्यटन और संस्कृति से जुड़ी विभागीय संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष संजय कुमार झा ने आज संसद में समिति की 387वीं से 391वीं रिपोर्ट पेश की. ये रिपोर्ट्स संसद के दोनों सदनों में रखी गईं, जिनमें खास तौर पर नागरिक उड्डयन क्षेत्र के कामकाज और बजट पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं.
सुरक्षा पर बढ़ती चिंता
समिति की रिपोर्ट संख्या 387 के मुताबिक, देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर स्थिति चिंताजनक है. महानिदेशालय नागरिक उड्डयन के ऑडिट में 754 विमानों में से 377, यानी करीब आधे विमानों में बार-बार तकनीकी खामियां पाई गईं. अहमदाबाद विमान हादसे में 260 लोगों की मौत और एक साल में करीब 100 सुरक्षा चूकों का हवाला देते हुए समिति ने विमानन सुरक्षा पर एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति बनाने की सिफारिश की है, जो छह महीने में अपनी रिपोर्ट दे.
निगरानी एजेंसी ही कमजोर
रिपोर्ट यह भी बताती है कि सुरक्षा की निगरानी करने वाली महानिदेशालय नागरिक उड्डयन खुद संसाधनों की कमी से जूझ रही है. 1,630 स्वीकृत पदों में से केवल 843 भरे हैं, यानी लगभग 48 प्रतिशत पद खाली हैं. समिति ने सरकार से स्पष्ट कहा है कि इस स्थिति को देखते हुए एक समयबद्ध भर्ती और प्रतिनियुक्ति योजना तुरंत तैयार की जाए.
उड़ान योजना पर सवाल
क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए शुरू की गई उड़ान योजना पर भी रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं. अब तक 9,200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं और 657 मार्ग चालू बताए गए हैं, लेकिन 150 से ज्यादा मार्ग अभी तक शुरू ही नहीं हो पाए. समिति ने सुझाव दिया है कि योजना का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाए, जिसमें प्रति यात्री लागत, मार्ग की व्यवहार्यता और सब्सिडी के बाद की स्थिति का आकलन शामिल हो.
यात्रियों के अधिकार अधूरे
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि देश में हर साल करोड़ों लोग हवाई यात्रा करते हैं, लेकिन यात्रियों के अधिकारों को लेकर कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है. समिति ने भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 के तहत एक औपचारिक यात्री अधिकार चार्टर बनाने की सिफारिश की है, ताकि देरी, रद्दीकरण और मुआवजे जैसे मामलों में स्पष्ट नियम तय हो सकें.
निवेश में पारदर्शिता की जरूरत
समिति के मुताबिक एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ने 2024-25 में अच्छा मुनाफा दर्ज किया है, लेकिन समिति ने पाया कि उसका बड़ा पूंजीगत निवेश संसद की सीधी निगरानी के दायरे में नहीं आता. इस पर समिति ने अधिक पारदर्शिता और संसदीय निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई है.
समिति की रिपोर्ट का संकेत साफ है,नागरिक उड्डयन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उसके साथ जरूरी सुरक्षा और संस्थागत मजबूती नहीं बढ़ पाई है. स्टाफ की कमी, सुरक्षा चूक और योजनाओं के अधूरे क्रियान्वयन जैसे मुद्दे बताते हैं कि अब इस क्षेत्र में सुधार टालना संभव नहीं है. यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता को प्राथमिकता देना ही सबसे बड़ी जरूरत है.
संबंधित खबरें
LIVE: महादेव सट्टा ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की आज रायपुर कोर्ट में पेशी
14 mins agoमुरासु चक्रवात के चलते आज स्कूल-कॉलेज बंद, आंध्र में भी भारी बारिश का अलर्ट
42 mins agoछात्रा पर हमला करने वाले सिरफिरे का एनकाउंटर, इलेक्ट्रिक आरी से काटा था गला
46 mins agoवोटर लिस्ट फर्जीवाड़े पर EC का एक्शन, दोषी अफसरों को होगी जेल और जुर्माना
7 hrs agoCM योगी को मिली गुड न्यूज! नेशनल सर्वे में बने देश के नंबर-1 मुख्यमंत्री
7 hrs agoखतरे में J&K की अब्दुल्ला सरकार, NC के 25 विधायकों ने दिया अल्टीमेटम
8 hrs ago'लचकती कमर, टेढ़ी गर्दन...' श्रीकृष्ण पर बयान देकर बुरे फंसे बाबा बागेश्वर!
10 hrs agoमहादेव सट्टेबाजी ऐप के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को ओमान से वापस लाई CBI
11 hrs ago'मैदान का बड़ा हिस्सा खाली था...', विपक्ष की महारैली पर BJP का पलटवार
13 hrs agoINDIA गठबंधन की रैली में क्या बोले खड़गे, तेजस्वी और फारूक अब्दुल्ला?
13 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines