बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बड़ी चालाकी से आरक्षण को परिसीमन से जोड़ दिया है, जिससे यह कानून 2034 से पहले लागू नहीं हो पाएगा। तेजस्वी यादव ने मांग की कि आरक्षण की सीमा 50% की जाए और इसमें ओबीसी (OBC) महिलाओं को भी जगह दी जाए। उन्होंने इसे केवल ‘दिखावा’ करार देते हुए कहा कि भाजपा और आरएसएस अपने एजेंडे के जरिए संविधान और लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका विपक्षी दल पुरजोर विरोध करेंगे।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि पूरा विपक्ष एकजुट होकर महिला आरक्षण का समर्थन करता है। उन्होंने मांग की कि सरकार परिसीमन का बहाना छोड़े और वर्तमान संख्या के आधार पर ही आरक्षण को तत्काल लागू करे। तिवारी ने आरोप लगाया कि परिसीमन के नाम पर संविधान के दायरे से बाहर जाकर किया जा रहा प्रयास देश की एकता और अखंडता के खिलाफ है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इस मुद्दे पर सरकार के पास कोई ठोस जवाब नहीं है और विपक्ष देश की सार्वभौमिकता की रक्षा के लिए पूरी तरह एकमत है।
संसद में अमित शाह ने कहा- दक्षिण से 129 की जगह 195 सांसद होंगे.
अमित शाह ने कहा- दक्षिण के राज्यों की शक्ति बढ़ेगी.
महिला आरक्षण बिल को लेकर अमित शाह ने कहा- संसद में दक्षिण का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा और परिसीमन में दक्षिण के राज्यों को घाटा नहीं.
महिला आरक्षण बिल के विरोध को लेकर अमित शाह ने कहा- बिल को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है.
महिला आरक्षण बिल पर प्रियंका गांधी ने कहा- पीएम मोदी ईमानदारी से कदम उठाते तो हम साथ होते, महिलाओं के आरक्षण का गलत इस्तेमाल ना करें पीएम मोदी.
प्रियंका गांधी ने अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा कि चाणक्य होते तो वो भी आज चौंक जाते.
महिला आरक्षण बिल पर प्रियंका गांधी ने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि- लोकतंत्र पर खुला वार हो रहा है, अगर ये बिल पास हुआ तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा.
महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी के भाषण के जवाब में प्रियंक गांधी ने कहा- इस बिल से राजनीति की बू आ रही है, कांग्रेस सबसे पहले महिला आरक्षण की बात की.
भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण पर कहा, “हर जगह जो महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है वह समाप्त होगा, जो महिलाएं चुनकर आएंगी वह बाकी महिलाओं के लिए प्रेरणा बनेंगी… प्रधानमंत्री मोदी यही चाहते हैं कि राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो।”
महिला आरक्षण बिल पर PM मोदी ने कहा- किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा.
आरक्षण बिल पर PM मोदी ने कहा- विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए बवंडर खड़ा कर रहे हैं.
महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी ने कहा- विपक्ष बहानेबाजी कर रहा है, अभी विरोध किया तो लंबा नुकसान होगा.
महिला आरक्षण बिल को लेकर पीएम मोदा ने कहा कि किसी के साथ भेदभाव या अन्याय नहीं होगा.
महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी बोले- हम नारी को उसका हक दे रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण और परिसीमन पर लोकसभा में बोलते हुए सांसदों से इस ऐतिहासिक अवसर का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी से जुड़े इस राष्ट्र-निर्माण कार्य में भाग लेना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। पीएम ने जोर देकर कहा कि सांसदों को इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए, क्योंकि यह सामूहिक प्रयास न केवल शासन व्यवस्था में संवेदनशीलता लाएगा, बल्कि भारत की राजनीति और भविष्य की दशा-दिशा तय करने में भी निर्णायक साबित होगा।
पीएम मोदी ने कहा- जब मैं संगठन का एक कार्यकर्ता था तब चर्चा होती थी कि देखिए ये कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण आराम से दे देते हैं, लेकिन क्योंकि उनमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है. हम सुरक्षित हैं इसलिए दे दो. इसलिए पंचायत में 50 प्रतिशत तक पहुंच गए.
PM मोदी ने कहा- हमारा सौभाग्य है कि हमें देश की आधी आबादी को राष्ट्र निर्माण की नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल होने का सौभाग्य मिल रहा है. यह बिल देश की दशा दिशा तय करेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर अपनी बात रखते हुए कहा कि 25-30 साल पहले जिस विचार की आवश्यकता महसूस की गई थी, आज उसे एक परिपक्व अवस्था में लाया गया है। उन्होंने लोकतंत्र की खूबसूरती का जिक्र करते हुए कहा कि समय की मांग के अनुसार इसमें सुधार करना ही ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ की पहचान है। पीएम ने जोर दिया कि भारत की हजारों वर्षों की लोकतांत्रिक विकास यात्रा में यह बिल एक नया आयाम जोड़ने का एक शुभ अवसर है, जिसका हिस्सा बनने का सौभाग्य वर्तमान सदन के सदस्यों को मिला है।
Parliament Special Session 2026 : देश की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हो रही है। संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र आज से शुरू हो गया है। इस सत्र में मोदी सरकार तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जो देश की राजनीति की पूरी तस्वीर बदल देंगे। इस सत्र का मुख्य लक्ष्य 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को जमीनी स्तर पर लागू करना और लोकसभा की ताकत को बढ़ाना है।
लोकसभा सीटों में होगा इजाफा
संसद के विशेष सत्र में सबसे बड़ी हलचल लोकसभा की सदस्य संख्या को लेकर रहेगी। सरकार की योजना लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 को बढ़ाकर 850 करने की है। इसके लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया जाएगा, जिसमें बढ़ती आबादी के हिसाब से संसद सदस्यों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान है।
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आज पेश होंगे ये तीन अहम बिल
संसद के पटल पर आज तीन प्रमुख विधेयकों की सूची जारी की गई है:
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- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026: इसके जरिए दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026: यह बिल संसद में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगा, इस बिल को केंद्रीय कानून मंत्री पेश करेंगे
- परिसीमन विधेयक 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बिल को पेश करेंगे, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का फिर से निर्धारण होगा
2029 चुनाव और महिला आरक्षण
केंद्र सरकार की रणनीति इन कानूनों के जरिए 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिलाओं के लिए आरक्षण को पूरी तरह प्रभावी बनाने की है। लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने इन बिलों पर चर्चा के लिए 18 घंटे का समय आवंटित किया है। पहले यह विधेयक लोकसभा में चर्चा के बाद पारित होंगे और फिर इन्हें राज्यसभा में भेजा जाएगा। देश के विशेषज्ञों का मानना है कि 'परिसीमन' इस पूरी प्रक्रिया का सबसे जटिल हिस्सा है, जिस पर विपक्षी दलों के साथ तीखी बहस होने की संभावना है. बहरहाल, यदि ये बिल पास होते हैं, तो यह भारतीय संसद के इतिहास का सबसे बड़ा पुनर्गठन होगा।
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