लोकसभा में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार तीनों बिल इसलिए लेकर आई है, ताकि जाति जनगणना के बाद आरक्षण न देना पड़े। इस पर सदन में गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया कि यह मेरा विभाग है। इस बार की जनगणना में जाति जनगणना कराई जा रही है। लेकिन वो दूसरे चरण में है, अभी सिर्फ मकानों की ही गणना हो रही है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के सभी लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को खत लिखा है। इसमें उन्होंने नारी शक्ति अधिनियम विधेयक के लिए समर्थन की मांग की है। सीएम फडणवीस ने सांसदों के साथ-साथ सत्ता पक्ष में शामिल और विपक्षी दलों के प्रदेश अध्यक्ष को भी खत लिखकर बिल के लिए समर्थन मांगा है।
राज्यसभा के डिप्टी चैयरमैन के लिए 17 अप्रैल को चुनाव होगा। विपक्ष ने इस चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। विपक्ष का कहना है कि लोकसभा में 7 साल से उपाध्यक्ष नहीं बनाया गया और अब राज्यसभा में तीसरी बार हरिवंश को राष्ट्रपति कोटे से नॉमिनेट करके लाया गया है। उपसभापति के लिए उम्मीदवार बना दिया गया है। इन सारी बातों पर विपक्ष से कोई चर्चा नहीं की गई।
संसद के विशेष सत्र की शुरुआत हो गई है। सत्र शुरू करते ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दिवंगत सिंगर आशा भोसले को श्रद्धांजलि दी। पूरे सदन ने 2 मिनट का मौन व्रत रखकर दिवंगत सिंगर की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
संसद के विशेष सत्र की रणनीति पर चर्चा के लिए विपक्षी दलों के नेताओं की संसद परिसर में बैठक हो रही है. बैठक का मुख्य फोकस महिला आरक्षण विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर रहा.
महिला आरक्षण बिल पर समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि “यह खुफिया लोगों की गुप्त योजना है… हम महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि जिस तरह से यह बिल लाया जा रहा है, उसके खिलाफ हैं। वे दलितों, मुस्लिमों और पिछड़ों के खिलाफ हैं। जब हम 33% आरक्षण की बात करते हैं, तो बिना सही आंकड़ों (जातिगत संख्या) के हम आरक्षण कैसे दे सकते हैं?”
समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय का बयान: “जिस तरह से 2023 में महिला आरक्षण बिल पास हुआ था, हम बिल्कुल वैसा ही चाहते हैं। वह बिल सर्वसम्मति से पास हुआ था, लेकिन अब इसमें संशोधन लाना दिखाता है कि सरकार की नीयत में खोट है… हम परिसीमन और जनगणना न कराए जाने के मुद्दे पर इसका विरोध करते हैं। जब सदन में इस पर चर्चा होगी, तो हम संसद में अपनी सारी बातें मजबूती से रखेंगे।”
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे भारत के लोकतंत्र के लिए एक ‘ऐतिहासिक दिन’ करार देते हुए विपक्ष से खास अपील की है। रिजिजू ने कहा कि लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का निर्णय एक ऐसा कदम है, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी दल दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस लंबे समय से लंबित विधेयक का समर्थन करेंगे।
विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे परिसीमन के मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाते हुए रिजिजू ने कहा, “मैं विपक्षी दलों से अपील करता हूं कि वे परिसीमन के नाम पर अफवाहें न फैलाएं। महिला आरक्षण का विरोध करने के लिए परिसीमन को बहाना न बनाएं।” उन्होंने विशेष रूप से आग्रह किया कि दक्षिण भारत के लोगों को इस मुद्दे पर गुमराह या भ्रमित करने की कोशिश न की जाए। संसदीय कार्य मंत्री ने साफ किया कि सरकार का उद्देश्य नेक है और विपक्ष को किसी भी बहाने से इस ऐतिहासिक महिला आरक्षण बिल को गिराने या कमजोर करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
Parliament Special Session 2026 LIVE : देश की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हो रही है। संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र आज से शुरू हो गया है। इस सत्र में मोदी सरकार तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जो देश की राजनीति की पूरी तस्वीर बदल देंगे। इस सत्र का मुख्य लक्ष्य 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को जमीनी स्तर पर लागू करना और लोकसभा की ताकत को बढ़ाना है।
लोकसभा सीटों में होगा इजाफा
संसद के विशेष सत्र में सबसे बड़ी हलचल लोकसभा की सदस्य संख्या को लेकर रहेगी। सरकार की योजना लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 को बढ़ाकर 850 करने की है। इसके लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया जाएगा, जिसमें बढ़ती आबादी के हिसाब से संसद सदस्यों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान है।
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आज पेश होंगे ये तीन अहम बिल
संसद के पटल पर आज तीन प्रमुख विधेयकों की सूची जारी की गई है:
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- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026: इसके जरिए दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026: यह बिल संसद में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगा, इस बिल को केंद्रीय कानून मंत्री पेश करेंगे
- परिसीमन विधेयक 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बिल को पेश करेंगे, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का फिर से निर्धारण होगा
2029 चुनाव और महिला आरक्षण
केंद्र सरकार की रणनीति इन कानूनों के जरिए 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिलाओं के लिए आरक्षण को पूरी तरह प्रभावी बनाने की है। लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने इन बिलों पर चर्चा के लिए 18 घंटे का समय आवंटित किया है। पहले यह विधेयक लोकसभा में चर्चा के बाद पारित होंगे और फिर इन्हें राज्यसभा में भेजा जाएगा। देश के विशेषज्ञों का मानना है कि 'परिसीमन' इस पूरी प्रक्रिया का सबसे जटिल हिस्सा है, जिस पर विपक्षी दलों के साथ तीखी बहस होने की संभावना है. बहरहाल, यदि ये बिल पास होते हैं, तो यह भारतीय संसद के इतिहास का सबसे बड़ा पुनर्गठन होगा।
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