हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

'संसद रंगमंच नहीं, लोकतंत्र का मंदिर है,' 204 पूर्व अधिकारी और रिटायर्ड जजों ने राहुल गांधी को घेरा

देश के 204 पूर्व सैन्य अधिकारी, रिटायर्ड जज और वरिष्ठ केंद्रीय और राज्य स्तर के ब्यूरोक्रेट्स ने नागरिकों के नाम एक सार्वजनिक पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने संसद की गरिमा और संवैधानिक नैतिकता की रक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

विज्ञापन

देश के 204 पूर्व सैन्य अधिकारी, रिटायर्ड जज और वरिष्ठ केंद्रीय और राज्य स्तर के ब्यूरोक्रेट्स ने नागरिकों के नाम एक सार्वजनिक पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने संसद की गरिमा और संवैधानिक नैतिकता की रक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस पत्र के समन्वयक एसपी वैद, आईपीएस ने इसे संसदीय अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण बताया।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि 12 मार्च को संसद परिसर में विपक्षी सांसदों, विशेषकर राहुल गांधी के नेतृत्व में, संसद के नियमों और स्पीकर के निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना हुई। स्पीकर द्वारा संसद परिसर में किसी भी प्रदर्शन या विरोध पर स्पष्ट निषेध जारी किया गया था, बावजूद इसके विपक्षी सांसदों ने इसे चुनौती दी।

विशेष रूप से चिंता का विषय यह है कि राहुल गांधी और उनके कुछ सहयोगी सांसद संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय और बिस्कुट का सेवन करते दिखाई दिए। पत्र में इसे संसद और उसके सदस्यों के प्रति पूर्णतः अनुचित और असंसदीय आचरण बताया गया। यह व्यवहार न केवल व्यक्तिगत राजनीतिक नाटकीयता को दर्शाता है, बल्कि संवैधानिक संस्था की गरिमा के प्रति गंभीर उपेक्षा भी दिखाता है।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: लोकसभा के 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन होगा रद्द, पक्ष-विपक्ष के बीच बनी सहमति

एसपी वैद ने कहा कि संसद को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है, जहां निर्वाचित प्रतिनिधि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श के लिए एकत्र होते हैं। संसद की सीढ़ियां और परिसर तमाशा या राजनीतिक रंगमंच के लिए नहीं बने हैं। इस तरह का आचरण न केवल संसदीय जीवन की परंपराओं और शिष्टाचार का उल्लंघन करता है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति घमंड और विशेषाधिकार की चिंताजनक भावना को भी उजागर करता है।

विज्ञापन

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसे कार्यों से जनता का बहुमूल्य समय और संसाधन बर्बाद होते हैं और संसद की कार्यवाही बाधित होती है। लोकतंत्र की प्रतिष्ठा और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए संसद में शालीनता और संयम के मानदंडों का पालन आवश्यक है।

पूर्व अधिकारियों और जजों ने जोर देकर कहा है कि राहुल गांधी को इस आचरण के लिए सार्वजनिक रूप से राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए और आत्ममंथन करना चाहिए। उनका कहना है कि विपक्ष के नेता के पद पर रहते हुए ऐसा व्यवहार लोकतंत्र की मूल अवधारणा और संसद की गरिमा के खिलाफ है।

विज्ञापन

पत्र में यह चेतावनी भी दी गई है कि लगातार ऐसे आचरण से संसद केवल एक नाटकीय मंच बन सकती है, जहां गंभीर विचार-विमर्श नहीं होता, और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रभावशीलता कम हो सकती है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस तरह के आचरण की निंदा करें और लोकतांत्रिक संस्थाओं के संरक्षण और सम्मान के लिए सतर्क रहें।

एसपी वैद ने कहा कि सांसदों का कार्य केवल व्यक्तिगत या राजनीतिक नाटकीयता तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनका आचरण देशवासियों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का प्रतीक होता है। संसद की गरिमा और संस्थागत पवित्रता सुनिश्चित करना हम सबका दायित्व है।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: UP चुनाव से पहले क्यों उल्टा पड़ा कांग्रेस का दांव? कांशीराम जंयती में शामिल होने पर

संबंधित खबरें

Tags:

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola