Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कई अहम जानकारियां साझा की हैं. उन्होंने बताया कि मई 2025 में हुआ यह सैन्य अभियान सिर्फ एक दिन की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इसे तीन अलग-अलग चरणों में अंजाम दिया गया था. साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के किराना हिल्स इलाके से जुड़े उस सवाल का भी जवाब दिया, जिस पर ऑपरेशन के बाद काफी चर्चा हुई थी.
6-7 मई को शुरू हुआ था अभियान
अनिल चौहान ने बताया कि अभियान का पहला चरण 6-7 मई को शुरू हुआ, जब भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की. इसके बाद 8-9 मई को दूसरे चरण में दोनों देशों ने ड्रोन और अन्य साधनों के जरिए एक-दूसरे की सैन्य तैयारियों को परखने की कोशिश की. तीसरे चरण में 10 मई को पाकिस्तान की ओर से हमला किया गया, जिसके जवाब में भारत ने उसके कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.
किराना हिल्स को लेकर खूब हुई चर्चा
सबसे ज्यादा चर्चा किराना हिल्स को लेकर हुई. यह इलाका सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में है और इसे पाकिस्तान के परमाणु ढांचे से जोड़कर देखा जाता है. चौहान ने बताया कि भारत ने किराना हिल्स या वहां मौजूद किसी परमाणु प्रतिष्ठान को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया था.
उन्होंने आगे कहा, सरगोधा के आस-पास पाकिस्तानी रडारों की तलाश के लिए कई लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे गए थे. ये हथियार करीब दो घंटे तक लक्ष्य की तलाश कर सकते थे. यदि उन्हें तय समय में लक्ष्य नहीं मिलता, तो वे नीचे गिर जाते थे. संभव है कि इनमें से एक किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराया होगा. इसी वजह से वहां से धुआं उठने की तस्वीरें सामने आई हों.
खराब मौसम के कारण बदला गया था लक्ष्य- चौहान
पूर्व CDS ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की ओर से बातचीत की पहल किए जाने के बावजूद भारत ने सैन्य दबाव बनाए रखा. उनके मुताबिक, सरगोधा पर कार्रवाई की अनुमति दी गई थी. इसके अलावा दो और लक्ष्यों पर विचार हुआ, जिनमें स्कर्दू शामिल था, लेकिन खराब मौसम के कारण बाद में लक्ष्य बदलकर भोलारी कर दिया गया.
ऑपरेशन की रणनीति को लेकर चौहान ने कहा कि भारत ने कम ऊंचाई वाले एयरस्पेस का इस्तेमाल किया, ताकि अभियान में जोखिम घटे और दुश्मन को अचानक कार्रवाई से चौंकाया जा सके. उन्होंने इसे पहले की उरी और बालाकोट कार्रवाइयों से अलग रणनीति बताया.
यह भी पढ़ें- डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की 4 कंपनियों पर लगाए प्रतिबंध, ईरान से क्रूड ऑयल और पेट्रोकेमिकल की डील करने की सजा
ट्रंप के दावे और सीजफायर पर पूर्व CDS ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में मध्यस्थता के दावे पर भी पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि संबंधित DGMO ने करीब दोपहर 3 बजे तक उपलब्ध नहीं होने की बात कही थी. इसके बाद शाम करीब 5 बजे सीजफायर को लेकर फैसला लिया गया. चौहान के मुताबिक, यह फैसला दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMOs) के बीच हुई प्रक्रिया का हिस्सा था और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका उन्हें दिखाई नहीं देती.
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अमेरिका को युद्धविराम की जानकारी आधिकारिक घोषणा से पहले कैसे मिल गई? चौहान ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि यह सूचना भारत की ओर से लीक नहीं हुई थी. उनका मानना है कि जानकारी पाकिस्तान की तरफ से किसी माध्यम से अमेरिकी पक्ष तक पहुंची होगी.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की भारतीय सैन्य गतिविधियों को लेकर समझ पर भी पूर्व CDS ने टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत की सैन्य कार्रवाइयों की सही तस्वीर समझने में काफी मुश्किल हुई. खासतौर पर समुद्री क्षेत्र में भारत की गतिविधियों को लेकर पाकिस्तान की जानकारी और आकलन कमजोर नजर आया.
अपने हमलों के असर का आकलन नहीं कर सका पाकिस्तान
जनरल अनिल चौहान ने बताया, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान अपनी ही सैन्य कार्रवाई के नतीजों को लेकर स्पष्ट नहीं था. उसे यह तक पुख्ता जानकारी नहीं थी कि उसके किए गए हमलों से भारत के किसी सैन्य ठिकाने को नुकसान पहुंचा भी है या नहीं. उन्होंने बताया कि इसी का सबूत हासिल करने के लिए पाकिस्तान ने 10 से 12 मई के बीच अमेरिकी और चीनी कंपनियों से व्यावसायिक सैटेलाइट तस्वीरें हासिल करने की कोशिश की. हालांकि, उसे इसमें सफलता नहीं मिली. चौहान के अनुसार, पाकिस्तान के हमले किसी महत्वपूर्ण और सटीक लक्ष्य को भेदने में सफल नहीं हुए थे. यही वजह रही कि सैटेलाइट तस्वीरों में भी उसे अपने हमलों से हुई किसी बड़ी तबाही का प्रमाण नहीं मिल सका.
तीन चरणों में चला था ऑपरेशन सिंदूर- अनिल चौहान
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति और उसके अलग-अलग चरणों को लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई एक ही दिन में पूरी नहीं हुई थी, बल्कि इसे तीन चरणों में अंजाम दिया गया.
पहला चरण: आतंकी ठिकानों पर सीधी कार्रवाई
जनरल चौहान ने बताया, अभियान की शुरुआत 6 और 7 मई को हुई. इस दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. इस कार्रवाई के जरिए आतंकी ढांचे पर सीधा प्रहार किया गया.
दूसरा चरण: ड्रोन के जरिए रणनीतिक बढ़त की कोशिश
ऑपरेशन का दूसरा दौर 8 और 9 मई को चला. इस दौरान भारत और पाकिस्तान, दोनों ने ड्रोन का इस्तेमाल किया. इसके जरिए एक-दूसरे की सैन्य तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को परखने के साथ विरोधी पक्ष को भ्रमित करने की कोशिश की गई.
तीसरा चरण: पाकिस्तान के हमले का जवाब
10 मई को ऑपरेशन अपने तीसरे और अहम चरण में पहुंचा, जब पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की गई. इसके जवाब में भारत ने भी प्रभावी पलटवार किया और पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.
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