संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा हो रही है। राज्यसभा में 30 जुलाई को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम घटना ह्रदय विदारक थी। पहलगाम की घटना निंदनीय है। सरकार संवेदनशील है इसलिए गृहमंत्री घटना वाले दिन ही शाम 5 बजे श्रीनगर पहुंच गए थे। पहलगाम हमला किसी को बर्दाश्त नहीं है।
विपक्ष मुझसे हंसी उधार ले ले
राज्यसभा ने जेपी नड्डा ने कहा कि इंफोर्मेशन वार का हवाला देकर विदेश से जो पैडल नैरेटिव है, उसका विरोध करना चाहिए। देश में जिस तरह से भारत ने दुनिया में संदेश दिया है, उसे आगे बढ़ाना चाहिए। अंत में नड्डा ने कहा कि यह देश का सवाल है विपक्ष को भी इसमें शामिल करना चाहिए। और हंसते-हंसते करना चाहिए। अगर थोडी़-सी हंसी कम हो तो मुझसे उधार ले लेनी चाहिए। लेकिन हंसते हंसते खुशी खुशी हमको इसका एक स्वर से स्वागत भी करना चाहिए।
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पुराने हमलों पर की बात
राज्यसभा में बोलते हुए सांसद जेपी नड्डा ने कहा कि साल 2005 के दिल्ली सीरियल बम विस्फोटों, 2006 के वाराणसी आतंकी हमले, 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन बम विस्फोटों में तब की सरकारन ने कोई कार्रवाई नहीं की। तब भी भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद और व्यापार और पर्यटन जारी रहा। जबकि हमने पाकिस्तान का बहिष्कार किया।
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फेल विदेश नीति का नरेटिव सेट किया जा रहा- नड्डा
राज्यसभा में नड्डा ने कहा कि पता नहीं क्यों ये नैरेटिव सेट किया जा रहा है कि कोई देश भारत के साथ नहीं आया। नड्डा ने बताया कि 61 देशों के मुखिया के संदेश मिले थे। जिसमें उन्होंने पहलगाम हमले की निंदा की थी। 35 विदेश मंत्री, 38 सांसदों और पूर्व मुखियाओं ने भारत से संपर्क किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पहलगाम हमले की निंदा की थी। आगे बताते हुए कहा कि क्वॉड ने पहलगाम हमले की निंदा की, ब्रिक्स ने निंदा की, सेंट्रल एशिया एशियन कंट्री ने निंदा की, इंडिनय ओसन रिम एसोसिएशन ने निंदा, पराग्वे के राष्ट्रपति ने निंदा की, यूरोपीय यूनियन, फ्रांस और जर्मनी ने निंदा की है।
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