वोटर लिस्ट में बदलाव और चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम ECINet को लेकर उठे सवालों के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुरुवार को बड़ा बयान जारी किया. चुनाव आयोग ने कहा कि ECINet एक सुरक्षित और डिसेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 और 1951 के प्रावधानों के तहत तैयार किया गया है. चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदाता सूची से जुड़े वैधानिक काम सिर्फ निर्धारित चुनाव अधिकारियों के जरिए ही किए जा सकते हैं.
कोई अधिकारी नहीं कर सकता छेड़छाड़
चुनाव आयोग ने ये भी स्पष्ट किया कि बूथ लेवल ऑफिसर, असिस्टेंट इलेक्ट्रोल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर, इलेक्ट्रोल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर, जिला निर्वाचन अधिकारी और यहां तक कि खुद मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अपने यूनिक आईडी और सुरक्षित पासवर्ड के जरिए ECINet पर वैधानिक कार्य करते हैं. ECI के अनुसार, इनके अलावा कोई अधिकारी इन अधिकारियों के अधिकारों का इस्तेमाल या उन्हें ओवरराइड नहीं कर सकता.
ECINet को लेकर क्या है विवाद?
गौरतलब है कि चुनाव आयोग का ये स्पष्टीकरण द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें इसीआई के भीतर मतदाता सूची के डिजिटल प्रबंधन को लेकर मतभेदों का दावा किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ECINet और ERONet पर तकनीकी कंट्रोल को लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने मतदाता डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण और जमीनी स्तर के अधिकारियों की पहुंच सीमित होने की चिंता दर्ज कराई थी.
रिपोर्ट में गोवा का उदाहरण भी सामने आया, जहां 97 मतदाताओं को स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र माना, लेकिन कथित तौर पर सॉफ्टवेयर में उनके नाम बहाल करने का विकल्प उपलब्ध नहीं था. इस मामले को ECINet के केंद्रीकृत तकनीकी नियंत्रण से जुड़ी बहस में अहम उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है.
68 लाख साइबर हमलों की कोशिश का भी जिक्र
चुनाव आयोग ने ECINet की साइबर सुरक्षा को लेकर भी जानकारी दी. ECI के अनुसार, 2026 के विधानसभा चुनावों की मतगणना के दिन उसके प्रमुख चुनाव प्लेटफॉर्म पर भारत और विदेशों से 68 लाख से अधिक संदिग्ध साइबर हमलों को रोका गया. आयोग ने कहा कि ऐसे साइबर खतरों से निपटने के लिए ECINet की सुरक्षा व्यवस्था उसके नियंत्रण में है.