NEET Leak Case: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बेहद सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और सुधारों के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि जब इतनी कड़ी निगरानी व्यवस्था थी तो फिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि बिना तय जवाबदेही के केवल सुरक्षा उपाय नाकाफी हैं।
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निगरानी में कहां चूक हुई? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल
सुनवाई के दौरान पूर्व इसरो (ISRO) अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति और सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। कोर्ट ने डॉ. राधाकृष्णन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे पहले उच्चाधिकार समिति में थे और बाद में निगरानी समिति में आए, तो फिर जमीनी स्तर पर निगरानी कितनी हुई? पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा:
"अगर इतनी सख्त निगरानी के बावजूद यह विफलता हुई है, तो इसका साफ मतलब है कि निगरानी प्रक्रिया में ही कोई गंभीर कमी या चूक रही होगी।"
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