प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि पिछले कई दशकों में उभरती सामाजिक बुराइयों और नई चुनौतियों से निपटने, विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ समाज को एकजुट करने और नागरिकों को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है. यहां चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी क्षमता के साथ सरकार के प्रमुख के रूप में पिछले 25 वर्षों में राष्ट्र की सेवा की है. इस दौरान उन्होंने चिन्मय मिशन के संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का भी प्रयास किया है.
चिन्मय मिशन एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य वेदांत और भगवद्गीता के ज्ञान को सभी लोगों के लिए सुलभ बनाना है. पीएम मोदी ने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है. उन्होंने कहा कि ‘चिन्मय’ का अर्थ शुद्ध चेतना है और इसके संस्थापक की दशकों लंबी यात्रा दैवीय संकल्पों से भी प्रेरित रही.
‘देश के सामने नई चुनौतियां…’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘पिछले कुछ दशकों में समय बदला है, देश के सामने नई चुनौतियां उभरी हैं और समाज में नई बुराइयां सामने आई हैं. आज इनसे निपटने की जिम्मेदारी हम सभी पर है. हमें समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट करना होगा. हमें अपने नागरिकों को आत्मनिर्भर बनने के प्रति जागरूक और प्रेरित करना होगा. हमें प्रत्येक व्यक्ति को 2047 तक विकसित भारत के संकल्प से जोड़ना होगा. इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हमें और अधिक सक्रिय होना होगा.’
‘नए भारत’ की जरूरतों को पूरा करे शिक्षा व्यवस्था
पीएम मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के आसपास के दौर में स्वामी चिन्मयानंद जैसी दूरदर्शी विभूतियों ने जिस दिशा की कल्पना की थी, आज देश उसी दिशा में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारी शिक्षा व्यवस्था ‘नए भारत’ की जरूरतों को पूरा करे, हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू की. इस नई नीति में भारतीय ज्ञान परंपराओं, मातृभाषाओं में शिक्षा, आधुनिक विज्ञान और अत्याधुनिक तकनीक को बहुत महत्व दिया गया है.’
चिन्मय अमृत महोत्सव में युवाओं की भूमिका पर जताई खुशी
मोदी ने कहा कि सरकार के प्रमुख के रूप में पिछले 25 वर्षों के दौरान, पहले गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री के तौर पर उनके प्रयासों और नीतियों के केंद्र में युवा रहे हैं. चिन्मय अमृत महोत्सव में युवाओं की भूमिका पर प्रसन्नता जताते हुए उन्होंने कहा कि उनमें से कई ने लगभग 300 दिनों में करीब 40,000 किलोमीटर की यात्रा की और एक लाख से अधिक युवाओं तक पहुंचे. उन्होंने कहा, ‘इस असाधारण प्रयास के लिए मैं पूरी टीम को बधाई देता हूं.’
भारत की चोरी की गई कलाकृतियों का भी जिक्र
पीएम मोदी ने चिन्मय मिशन को सैकड़ों-हजार युवाओं के मार्गदर्शन और उन्हें तैयार करने का श्रेय दिया. उन्होंने कहा कि ये युवा भारत के सांस्कृतिक दूत के रूप में काम कर रहे हैं और भारतीय मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘परम पूज्य गुरुदेव (स्वामी चिन्मयानंद) का यह योगदान भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का एक महत्वपूर्ण अध्याय है. मोदी ने भारत की चोरी की गई सांस्कृतिक कलाकृतियों को वापस लाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया.
उन्होंने कहा कि अतीत में अनगिनत बेशकीमती मूर्तियां विदेश ले जाकर बेच दी गईं, लेकिन उनके गायब होने पर किसी ने सवाल नहीं उठाया. पीएम मोदी ने कहा, ‘उन मूर्तियों के बारे में पूछताछ करने वाला तो दूर, उनकी पूजा करने वाला भी कोई नहीं था. किसी ने उनके बारे में पूछा तक नहीं. पिछले 12 वर्षों में हम चोरी की गई 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां वापस लाए हैं. इसके अलावा, हमारे सांस्कृतिक विरासत स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जा रहा है.’