Mother's Day पर पढ़ें कैप्टन यशिका त्यागी की वीरगाथा, प्रेग्नेंसी में 'कारगिल युद्ध' में दुश्मनों को चटाई थी धूल

भारत के लिए आज का ‘मदर्स डे’ की मायनों में खास है क्योंकि पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ भारत की इस लड़ाई में भारतीय महिला सैनिकों ने गजब का जज्बा दिखा रही है। इसलिए ‘मदर्स डे’ के इस खास मौके पर आपको कैप्टन यशिका त्यागी की वीरगाथा पढ़नी चाहिए, जिन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान ‘कारगिल युद्ध’ में दुश्मनों को हार का स्वाद चखाया था।

Mother's Day EX Captain Yashika Tyagi Story

आज पूरी दुनिया ‘मदर्स डे’ का जश्न मना रही है। वहीं, भारत और पाकिस्तान के बीच हालात काफी गंभीर हैं। बीते दिन सीजफायर के बाद भी पाकिस्तान अपनी कायराना हरकत से बाज नहीं आया और सीजफायर का उल्लंघन करते हुए भारत के सीमावर्ती इलाकों पर हमला करने की कोशिश की। पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में भारत की महिला जवान अग्रीणी भूमिका निभा रही है और दुश्मनों के नापाक इरादों और हमलों को ध्वस्त कर रही हैं। इस दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह लगातार भारत की तरफ से की जाने वाली कर्रवाई के बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बता रही हैं।

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ये पहली बार नहीं है कि भारत-पाकिस्तान की लड़ाई में भारतीय महिला सामने आ चुकी हैं। इससे पहले ‘कारगिल युद्ध’ में भी भारतीय महिला सैनिकों ने इसी तरह का जोश और जज्बा दिखाया था। ऐसी एक जाबाज भारतीय महिला जवान की कहानी हम आपको बताने वाले हैं जिन्होंने 2 महीने की गर्भावस्था में ‘कारगिल युद्ध’ में दुश्मनों को धूल चटाई थी। हम बात कर रहे हैं कैप्टन यशिका हटवाल त्यागी की…

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हाई एल्टीट्यूड पर पोस्ट होने वाली पहली महिला सैनिक

कैप्टन यशिका त्यागी भारत की महिला सैनिक थीं, जिनकी पोस्टिंग हाई एल्टीट्यूड (लेह के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र) और एक्सट्रीम कोड पर हुई थी। कैप्टन यशिका त्यागी 1997 में लेह में लॉजिस्टिक विंग में तैनात हुई थीं। इस पोस्ट पर उनके दो साल होने वाले थे, जिसके बाद 1999 में उनकी पोस्टिंग बदलने वाली थी। इस दौरान उन्हें पता चला कि वह गर्भवती हैं। लेकिन इसी बीच ‘कारगिल युद्ध’ छिड़ गया।

Mother's Day EX Captain Yashika Tyagi Story (1)

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प्रेग्नेंसी में ‘कारगिल युद्ध’ में निभाई खास भूमिका

कैप्टन यशिका हटवाल त्यागी ने एक कार्यक्रम के दौरान नौजवान लड़के और लड़कियों का मनोबल बढ़ाते हुए बताया कि वह चाहती तो गर्भावस्था का कारण देकर ‘कारगिल युद्ध’ से बाहर हो सकती थीं। लेकिन उन्होंने ‘कारगिल युद्ध’ का हिस्सा बनना चुना। इस दौरान वह 2 महीने की प्रेग्नेंट थीं। इसके अलावा युद्ध के दौरान देश में आपातकाल जैसी स्थिति बन गई थी। जिसकी वजह से उन्हें अपने 2 साल के बेटे को भी अपने साथ रखना पड़ा था।

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बखूबी निभाया मां और बेटी का फर्ज

उस दौरान उन्होंने देश की बेटी होने के साथ-साथ अपने बच्चों के लिए मां का फर्ज भी बखूबी निभाया था। कैप्टन यशिका त्यागी बताती हैं कि ‘कारगिल युद्ध’ मई 1999 से लेकर जुलाई 1999 तक चला था और ये तीन महीने उनके जीवन का बहुत खास समय था।

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