उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सौरभ राजपूत मर्डर केस में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा हुई है. ऐसे में सवाल यह उठा है कि मुस्कान रस्तोगी की 10 महीने की बेटी मन्नत उर्फ राधा का क्या होगा? भारतीय कानून के अनुसार 6 साल की उम्र तक बच्चा जेल में ही मां के साथ रहता है और उसके बाद ही उसके भविष्य पर फैसला लिया जाता है. अगर परिजन अपनाते नहीं हैं तो उसे किसी को गोद दिया जा सकता है. मुस्कान की बड़ी बेटी 7 साल की है और ननिहाल में रहती है. छोटी बेटी का जन्म जेल में हुआ, लेकिन उसे सौरभ राजपूत का परिवार अपनाना नहीं चाहता, क्योंकि वे उसे साहिल का बच्चा नहीं मानते.
बच्ची को गोद लेने की इच्छा रखते फैजान अंसारी
मुस्कान की बेटी मन्नत उर्फ राधा को गोद लेने के लिए मुंबई का इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी सामने आया है. फैजान ने मेरठ में DGC केके चौबे से मुलाकात करके राधा को गोद लेने की इच्छा जताई है. राधा के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठाने के लिए उन्होंने मेरठ के जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र के साथ अपनी आर्थिक स्थिति की डिटेल देते हुए राधा की परवरिश करने, उसकी शिक्षा, चिकित्सा और शादी तक का खर्च उठाने की इच्छा जताई है. वहीं DGC चौबे का कहना है कि मुस्कान की मंजूरी के बिना राधा को उन्हें गोद नहीं दिया जा सकता, लेकिन अगर वे राधा के पालन-पोषण में मदद करना चाहते हैं तो प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है.
मां की मर्जी के बिना गोद नहीं दिया जा सकता
बता दें कि भारत में बच्चे को गोद लेने के लिए कानून बनाए गए हैं, वहीं कई नियम और शर्तें भी हैं, जिनका पालन सख्ती से किया जाता है. भारतीय कानून के अनुसार, बच्चे को उसकी मां की मर्जी के बिना किसी तीसरे पक्ष को नहीं सौंपा जा सकता. अगर मां परमिशन दे तो बच्चे को गोद ले-दे सकते हैं और अगर मां बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ हो तो वह उसे सरेंडर कर सकती है, जिसके बाद बच्चे को किसी को गोद दिया जा सकता है. वहीं बच्चे को किसी तीसरे को गोद देने के मामले में उसके माता या पिता दोनों के रिश्तेदारों को प्राथमिकता दी जाती है. अगर वे इनकार करें तो बाहरी शख्स को गोद दिया जाता है.
जेल में बंद मां के साथ रहने वाले बच्चों के लिए नियम
भारतीय कानून के अनुसार, अगर बच्चे की मां जेल में है या उसका जन्म जेल में ही हुआ है तो बच्चा 6 साल का होने तक मां के साथ जेल में ही रहेगा, जहां उसके पालन-पोषण के लिए सभी इंतजाम किए जाएंगे. वहीं अगर मां चाहे तो 3 साल का होने के बाद बच्चे को किसी बाहरी पक्ष को सौंपा जा सकता है. 3 साल का होने तक बच्चे को मां से अलग करने की बात ही नहीं की जाएगी. 6 साल का होने के बाद जिला बाल कल्याण समिति और जिला मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार बच्चे के पुनर्वास पर फैसला लेते हैं. वे या तो बच्चे को शेल्टर होम में भेज सकते हैं या किसी रिश्तेदार को या बाहरी पक्ष को गोद दे सकते हैं. लेकिन किसी भी स्थिति या परिस्थिति में मां से सीधे बच्चे को छीनना कानूनन अपराध है.
कोई गोद लेने न आए तो बच्चे का क्या होगा?
भारतीय कानून के अनुसार, जेल में कैद मां बच्चे की परवरिश नहीं कर सकती और वह उसे सरेंडर कर दो तो बाल कल्याण समिति (CWC) मां की काउंसलिंग करने या ‘कूलिंग पीरियड’ यानी सोचने का समय देने के बाद बच्चे को गोद दे सकती है. अगर बच्चे को गोद लेने कोई नहीं आता तो सामाजिक कल्याण विभाग या बाल देखरेख संस्थान (CCI) को सौंपा जा सकता है. अगर बच्चे को उसके दादा-दादी, नाना-नानी या चाचा-चाची गोद लेना चाहते हैं तो बाल कल्याण समिति (CWC) कोर्ट और मां की अनुमति से प्रक्रिया पूरी करेंगे.
बच्चे को गोद लेने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) पोर्टल के जरिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर जिला मजिस्ट्रेट (DM) के आदेश के बाद कानूनन गोद लिया जा सकता है. अगर बच्चे के माता-पिता दोनों जेल में कैद हैं और बच्चे की देखभाल करने के लिए बाहर कोई पारिवारिक सदस्य नहीं है तो जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) बच्चे को अपने संरक्षण में लेती है.
बच्चे को गोद लेने वाले जोड़े के लिए नियम
भारतीय कानून के अनुसार, बच्चा गोद लेने के लिए शख्स का शादीशुदा होना अनिवार्य है और बच्चा गोद लेने के लिए दोनों की सहमति अनिवार्य है. शादी को कम से कम 2 साल होने चाहिए. वहीं अगर अकेली महिला किसी लड़के या फिर लड़की को गोद लेना चाहती है तो वह गोद ले सकती है, लेकिन अकेला पुरुष किसी लड़की को गोद नहीं ले सकता है. 2 साल तक के बच्चों को गोद लेने के लिए जोड़े की उम्र दोनों की मिलाकर 85 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. सिंगल माता या पिता की उम्र 40 साल से ज्यादा नहीं हो.
2 से 4 साल के बच्चों के लिए जोड़े की उम्र दोनों को मिलाकर 90 साल होनी चाहिए और सिंगल माता-पिता की उम्र 45 साल होनी चाहिए. 4 से 8 साल के बच्चों के लिए जोड़े की उम्र दोनों को मिलाकर 100 साल और सिंगल माता-पिता की उम्र 50 साल होनी चाहिए. बच्चे को गोद लेने वाले जोड़े का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है. जानलेवा बीमारी से ग्रस्त नहीं होना चाहिए. बच्चे के पालन पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए आर्थिक स्थिति मजबून होनी चाहिए.