दिल्ली-NCR में दशहरे के अगले दिन ही वायु प्रदूषण इतना बढ़ गया कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया. इसलिए दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देश पर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया. ऐसे में अब सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाएगा. कंस्ट्रक्शन साइट्स पर धूल मिट्टी को कंट्रोल किया जाएगा. होटलों और ढाबों में कोयले-लकड़ी के तंदूर पर रोक रहेगी. वाहन और उद्योगों से निकलने वाले धुएं, डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर रोक रहेगी और लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है.
GRAP क्या है और इसे कब नोटिफाई किया गया?
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने बनाई गई फेजवाइज वर्कप्लानिंग है. दिल्ली में वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने और वायु गुणवत्ता को बिगड़ने से रोकने के लिए अलग-अलग फेज में Grap लागू किया जाता है. दिसंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 12 जनवरी 2017 को Grap को नोटिफाई किया है. इसे लागू करने की जिम्मेदारी पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) को सौंपी थी, लेकिन सरकार ने साल 2021 में EPCA को भंग करके वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) गठित कर दिया गया.
दिल्ली-NCR में ग्रैप कौन लागू करता है और कैसे?
दिल्ली-NCR में GRAP-1 या GRAP-2 लागू करने का फैसला वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की एक सब-कमेटी करती है. यही समिति केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के जरिए दिल्ली-NCR में लगे मॉनिटरिंग स्टेशनों से दिल्ली और इससे सटे NCR के शहरों में हवा की क्वालिटी चेक करती है. यही कमेटी आंकलन करती है कि अगले 2-3 दिन में हवा की क्वालिटी कैसी होती है? हवा की क्वालिटी और प्रदूषण के स्तर के आधार पर समीक्षा करके ग्रैप लागू करने का निर्देश दिया जाता है. CAQM के आदेशों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने चैलेंज किया जा सकता है. CAQM सिर्फ निर्देश जारी करता है, जिन्हें लागू करने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार, NCR की राज्य सरकारों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की होती है.
दिल्ली-NCR में कब किस स्टेज का ग्रैप लगेगा?
दिल्ली-NCR में Grap के अलग-अलग फेज वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के लेवल के आधार पर लागू किए जाते हैं. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़ों, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के मौसम पूर्वानुमान के आधार ग्रैप के स्टेज लागू किए जाते हैं. GRAP-1 तब लागू होता है, जब हवा की क्वालिटी खराब होती है और AQI का लेवल 201 से 300 के बीच होता है.
GRAP-2 तब लागू होता है, जब हवा की क्वालिटी बहुत खराब हवा हो जाती है और AQI का लेवल 301 से 400 के बीच होता है. GRAP-3 तब लागू होता है, जब हवा की क्वालिटी गंभीर हो जाती है और AQI का लेवल 401 से 450 के बीच होता है. GRAP-4 तब लागू होता है, जब हवा की क्वालिटी बहुत गंभीर हो जाती है और AQI का लेवल 450 से ज्यादा हो जाता है. आमतौर पर सर्दियों के मौसम में ग्रैप-4 तक लागू करने की नौबत आ जाती है.
CAQM के आदेशों के उल्लंघन करने पर सजा
बता दें कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की स्थापना साल 2021 में हुई थी. यह आयोग दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का वैधानिक निकाय है. अधिनियम 2021 की धारा 3(6) के तहत, CAQM के आदेश राज्य सरकारों, CPCB और राज्य प्रदूषण बोर्डों पर लागू होंगे. धारा 14 के तहत इसके आदेशों का उल्लंघन करने पर 5 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. धारा 14 और 15 के तहत पराली जलाने वाले किसानों को सजा-जुर्माने से छूट मिलेगी, लेकिन धारा-18 के तहत उनके खिलाफ राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण में शिकायत की जा सकती है. धारा 16 के तहत केंद्र सरकार CAQM के फंड देती है और यह केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है.