Manish Tewari meets PM Modi : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है, क्या मनीष तिवारी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं? इसका सीधा और स्पष्ट जवाब यह है कि मनीष तिवारी ने इस मुलाकात को पूरी तरह से गैर-राजनीतिक और शिष्टाचार भेंट बताया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करने पीएमओ (PMO) पहुंचे थे और उनके कांग्रेस छोड़ने की तमाम अफवाहें पूरी तरह आधारहीन हैं.
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अटकलों पर मनीष तिवारी का दोटूक जवाब
विपक्ष में रहते हुए भी अक्सर राष्ट्रीय और विकासात्मक मुद्दों पर कूटनीतिक रुख अपनाने वाले मनीष तिवारी ने कहा, “मैं अभी भी थोड़ा पुराने विचारों का इंसान हूं, जो बुनियादी शिष्टाचार, प्रोटोकॉल के सिद्धांतों और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विकास की प्राथमिकताओं में विश्वास रखता है. कोई मेरे बारे में क्या सोचता है, इससे परे मैं ऐसा ही हूं!”
मनीष तिवारी ने हाल ही में 17 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ और उनके पूर्व संसदीय क्षेत्र श्री आनंदपुर साहिब में प्रधानमंत्री द्वारा कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन समारोह का जिक्र करते हुए कहा कि वे इस कार्यक्रम में इसलिए उपस्थित थे क्योंकि ये परियोजनाएं उन लोगों के जीवन को बेहतर बनाएंगी जिनकी सेवा के लिए उन्हें चुना गया है. उन्होंने याद दिलाया कि साल 2022 में भी जब पीएम मोदी ने न्यू चंडीगढ़ में कैंसर अस्पताल का उद्घाटन किया था, तब भी वे वहां मौजूद थे क्योंकि वह लोगों की लाइफलाइन से जुड़ा मामला था.
क्यों सुर्खियां बटोर रही PM मोदी और मनीष तिवारी की मुलाकात की तस्वीर?
राजनीति में बढ़ते जहर पर जताई चिंता
सांसद ने आज की राजनीति के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए लिखा, “एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में पिछले 45 वर्षों में मैंने राजनीति को व्यवस्थित रूप से टूटते हुए देखा है. आज की राजनीति तेजी से जहरीली हो गई है, जहां राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को अब जानी दुश्मन माना जाने लगा है. दिल्ली आज इस टूटी हुई राजनीति का प्रतीक बन चुकी है.”
गौरतलब है कि पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. हाल ही में जब कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब में संगठनात्मक फेरबदल करते हुए नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया था, तब मनीष तिवारी ने खुलेआम अपनी नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि इतना बड़ा फैसला लेने से पहले उनसे राय-मशविरा तक नहीं किया गया. ऐसे में पीएम मोदी के साथ उनकी यह नजदीकी कांग्रेस आलाकमान के लिए नई सिरदर्दी साबित हो सकती है.
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