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मणिपुर वीडियो कांड में सु्प्रीम कोर्ट पहुंचीं पीड़िताएं, केंद्र-राज्य के खिलाफ दाखिल की याचिका, आज सुनवाई

Manipur Video Case Victims: मणिपुर वायरल वीडियो केस की पीड़िताएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं। पीड़िताओं ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ याचिका दाखिल की है। याचिका पर आज सीजेआई चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई करेगी। पीड़िताओं ने 4 मई की यौन उत्पीड़न घटना से संबंधित एफआईआर के संबंध में अपनी […]

संसदीय पैनल ने उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायिक नियुक्तियों में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व की सिफारिश की है। -फाइल फोटो
Manipur Video Case Victims: मणिपुर वायरल वीडियो केस की पीड़िताएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं। पीड़िताओं ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ याचिका दाखिल की है। याचिका पर आज सीजेआई चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई करेगी। पीड़िताओं ने 4 मई की यौन उत्पीड़न घटना से संबंधित एफआईआर के संबंध में अपनी पहचान की सुरक्षा के लिए याचिका के साथ एक अलग आवेदन दायर किया है। ये तब सामने आया है जब भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ आज, 31 जुलाई को गृह मंत्रालय (एमएचए) के जवाब का अध्ययन करने के लिए तैयार है।

पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट को दी थी ये जानकारी

पिछले हफ्ते गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मणिपुर में दो महिलाओं को न्यूड घुमाने के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है। सीबीआई ने अब औपचारिक रूप से मामले को अपने हाथ में ले लिया है और एफआईआर दर्ज की है। गृह मंत्रालय ने अपने सचिव अजय कुमार भल्ला के माध्यम से दायर एक हलफनामे में शीर्ष अदालत से समयबद्ध तरीके से इसके निष्कर्ष के लिए मामले की सुनवाई को मणिपुर से बाहर स्थानांतरित करने का भी आग्रह किया। मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

19 जून को सामने आया था मणिपुर का वीडियो

मणिपुर की दो महिलाओं को न्यूड परेड कराने और उनके साथ गैंगरेप का मामला 19 जून को सामने आया था। मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पुलिस ने थौबल जिले के नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। शीर्ष अदालत ने 20 जुलाई को घटना पर ध्यान दिया था। सीजेआई चंद्रचूड़ ने केंद्र और मणिपुर सरकार को तत्काल उपचारात्मक, पुनर्वास और निवारक कदम उठाने और की गई कार्रवाई से शीर्ष अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया था।


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