म्यांमार ट्रेनिंग कैंप केस के आरोपी मैथ्यू वैन डाइक को दिल्ली की एक कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शुक्रवार को अदालत ने मैथ्यू और 6 यूक्रेनी नागरिकों को भारत से बाहर रहने के एक्सटेंशन को 24 फरवरी तक बढ़ा दिया है. म्यांमार ट्रेनिंग कैंप केस की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है. विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सात विदेशी नागरिकों के आवेदनों पर सुनवाई करते हुए ये आदेश पारित किया. ये कार्यवाही बंद कमरे में हुई.
क्या बोले वैनडाइक?
अदालत का फैसला NIA के ये कहने के बाद आया कि उन्हें मामले के कई पहलुओं की जांच के लिए और समय चाहिए. इसके वकील राहुल त्यागी ने इस बारे में दलील दी थी. कोर्ट ने वैनडाइक को अमेरिका लौटने की भी छूट दे दी, क्योंकि वो शुक्रवार को व्यक्तिगत तौर पर पेश हुए थे. बाकी छह आरोपी स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए. अदालत कक्ष के बाहर वैनडाइक ने अपने खिलाफ मामले को जारी रखने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ”इसके जारी रहने का कोई कारण नहीं है. अगर नहीं, तो मैं भारत में ही रहूंगा. जब तक ये खत्म नहीं हो जाता.”
पिछले महीने मिली थी जमानत
वैनडाइक को पिछले महीने डिफॉल्ट जमानत दी गई थी. वो अदालत में पेश होने और विदेश यात्रा के लिए दी गई अनुमति के विस्तार की मांग करने के लिए भारत लौट आए थे. सितंबर में कोर्ट ने मैथ्यू को अपने परिवार से मिलने के लिए एक महीने के लिए अमेरिका की यात्रा करने की अनुमति दी थी, बशर्ते कि वह भारत लौटें और अदालत के सामने पेश हों. अमेरिकी नागरिक ने ये भी कहा कि आर्थिक तंगी की वजह से उसने अपने वकील को हटा दिया था.
उन्होंने कहा, “मामले पर मेरी कोई टिप्पणी नहीं है. अब जब मैं अपना वकील हूं. मैं इसके बारे में बात नहीं करना चाहता. पैसे का मुद्दा है.” वैनडाइक ने मामले में अमेरिकी दूतावास से कोई मदद मिलने से भी इनकार किया.
क्या है आरोप?
NIA ने आरोप लगाया था कि वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों ने टूरिस्ट वीजा पर भारत में एंट्री ली, जरूरी परमिट के बिना नॉर्थ-ईस्ट की यात्रा की और बाद में मिजोरम से म्यांमार चले गए, जहां उन्होंने कथित तौर पर जातीय सशस्त्र संगठनों को ट्रेनिंग दी. एजेंसी ने शुरू में साजिश से जुड़े प्रावधानों समेत गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों को लागू किया था. इसमें ये भी आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने नेटवर्क के बारे में विवरण का खुलासा किया और उपकरण इकट्ठा करने और म्यांमार में एक पैसेंजर फ्लाइट को निशाना बनाने में शामिल थे. हालांकि, NIA ने अपनी चार्जशीट पर UPA प्रावधानों को लागू नहीं किया और इसके बजाय इमिग्रेशन और विदेशी अधिनियम की धारा 21 और 23 के तहत कार्यवाही की.