महिला आरक्षण कानून, जिसे आधिकारिक तौर पर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' या कहा जाता है, भारत में संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने वाला ऐतिहासिक कानून है. इस कानून के तहत लोकसभा में कुल 543 सीटों का एक-तिहाई यानी 181 महिलाओं के लिए आरक्षित होगा. अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए पहले से आरक्षित सीटों में से भी एक-तिहाई सीटें SC/ST महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. यह कानून लागू होने के बाद शुरुआत में 15 वर्षों के लिए होगा, जिसे संसद बाद में बढ़ा सकती है.
आरक्षित सीटों का रोटेशन हर परिसीमन के बाद होगा, जिसे संसद द्वारा कानून बनाकर तय किया जाएगा. पुदुचेरी जैसे कुछ केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं पर यह लागू नहीं होगा.
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महिला आरक्षण कानून की जरूरत क्यों?
लोकसभा में महिलाओं की संख्या केवल 15% के आसपास है, जबकि कई देशों में यह आंकड़ा बहुत अधिक है. यह कानून नीति निर्माण में महिलाओं की आवाज़ को मजबूत करने के लिए लाया गया है. यह विधेयक सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र में पेश किया गया था, लोकसभा और राज्यसभा दोनों में भारी बहुमत से पारित हुआ, और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन गया. यह 1996 से चली आ रही मांग का नतीजा है, जिसे कई बार पेश किया गया लेकिन पास नहीं हो सका था.
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परिसीमन से पहले लागू करने की तैयारी क्यों?
मूल कानून में प्रावधान था कि यह आरक्षण अगली जनगणना के बाद और उसके आधार पर होने वाले परिसीमन के पूरा होने के बाद ही लागू होगा. इससे लागू होने में देरी हो रही थी. अब केंद्र सरकार परिसीमन से पहले ही इसे लागू करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए कानून में संशोधन कर परिसीमन से पहले ही लागू किए जाने की योजना है. इसके लिए मौजूदा बजट सत्र में ही संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस विधेयक को अगले सप्ताह पहले राज्यसभा में पेश किए जाने की संभावना है. सरकार ने विपक्ष को भी इस पर विश्वास में लेने के प्रयास शुरू कर दिए हैं ताकि संसद में विधेयक बिना किसी बाधा के पारित हो सके.
क्यों जल्दबाजी में है सरकार?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार बजट सत्र में संशोधन पारित कर लेती है तो इसे 2027 के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में लागू किया जा सकता है. इससे न केवल महिला मतदाताओं के बीच एक बड़ा संदेश जाएगा, बल्कि अगले लोकसभा चुनावों से पहले यह गेम-चेंजर साबित होगा. बिना परिसीमन के सीटें कैसे तय होंगी, यह एक बड़ा सवाल है. चर्चा है कि सरकार इसके लिए 'लॉटरी सिस्टम' या रोटेशन का सहारा ले सकती है. वहीं विपक्ष भी 'कोटा के भीतर कोटा' यानी OBC आरक्षण की अपनी पुरानी मांग को फिर से उठा सकता है.