CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत प्रक्रिया में एक नया मोड़ आ गया है. सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट को मिली धमकी के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ NCR यानी नॉन कॉग्निजेबल रिपोर्ट दर्ज की गई है. दोनों नेता 14 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में हैं. दोनों को जंतर मंतर पर तिरंगा लहराने और नारेबाजी करने के बाद न्यायिक हिरासत में लिया गया था. CJP की लीगल हेड ने पुलिस पर ताकत के दुरुपोयग और जमानत में जानबूझकर देरी का आरोप लगाया है. रत्ना सिंह का कहना है कि अलग अलग कारण बताकर सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत नहीं दी जा रही. रत्ना सिंह के मुताबिक जमानत की चार याचिकाओं को इसी आधार पर खारिज किया गया है.
क्यों उलझा मामला?
इस बीच मजिस्ट्रेट को मिली धमकी ने इस मामले को और उलझा दिया है. इस मामले में जो NCR दर्ज की गई है उसमें किसी का नाम या कोई और जानकारी नहीं है, NCR ऐसे अपराधों के मामले में दर्ज किया जाता है, जिनमें पुलिस किसी को बिना वारेंट के गिरफ्तार नहीं कर सकती और मजिस्ट्रेट की इजाजत के बैगर मामले की जांच भी नहीं की जा सकती. रत्ना सिंह का कहना है कि धमकी की सूचना को आधार बनाकर जमानत याचिका दिन भर पर सुनवाई टलती रही. रत्ना के मुताबिक वो और उनकी टीम सुबह 11 बजे से थाने में मौजूद थी, लेकिन असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस जो स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के रूप में भी काम करते हैं, वो शाम 4:42 बजे तक नहीं पहुंचे.
CJP का बयान
रत्ना सिंह का कहना है कि अगर धमकी मिली है तो धमकी देने वालों पर कार्रवाई की जाए, उनके नाम बताए जाए, इनके नाम और नंबर आदेश में दर्ज किए जाए लेकिन सुनवाई में देरी क्यों हो रही है? उधर दिल्ली पुलिस ने देरी के आरोपों को खारिज किया है . एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि दरअसल, रत्ना सिंह और उनकी टीम गलत जमानत बॉन्ड जमा कर रहे हैं. ऐसे जमानती बॉन्ड को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. पुलिस को प्रक्रिया का पालन करना ही होगा. वहीं एसईएम का कहना है कि धमकियों और खतरे के बीच वो काम नहीं कर सकते. इसलिए सुनवाई में देरी हुई. फिलहाल धमकी मामले की जांच चल रही है,. इस बीच CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके दिल्ली से रवाना हो गए हैं, उनका कहना है कि जैसे ही सौरव और आशुतोष को जमानत मिलती है, टीम एक साथ बैठकर फिर से आंदोलन की रणनीति बनाएगी.