मद्रास हाई कोर्ट ने वीरमणि POCSO मामले पर मीडिया डिबेट पर रोक लगाई. बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े वीडियो के प्रसार की जांच की मांग करते हुए तुलिर फाउंडेशन ने एक याचिका दायर की थी, जिसपर जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने आदेश पारित किया. कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को समझे बिना मीडिया के काम करने के कारण, कोई भी पीड़ित शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे नहीं आएगा. अदालत ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता का मतलब मीडिया ट्रायल करना नहीं है. जेम वीरमणि के खिलाफ मामले से जुड़े वीडियो प्रकाशित करने पर मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगा दी गई है. केंद्र सरकार, राज्य सरकार, पुलिस विभाग और वीडियो पब्लिश करने वाले मीडिया आउटलेट्स को अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया है.
कोर्ट ने कहा कि जिन संस्थाओं पर रोक लगाई गई है, उन्हें बच्चों के साथ दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने की आजादी है, बशर्ते वे मामले के तथ्यों पर बात ना करें. अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा-”कई पीड़ित अपनी लाइफ में आगे बढ़ चुके होंगे. अगर वीडियो लीक हो जाते हैं, तो दूसरे पीड़ित रिपोर्ट करने के लिए आगे कैसे आएंगे. मद्रास हाई कोर्ट ने इसे एक गंभीर अपराध बताते हुए कहा- ”जो लोग इस क्राइम का शिकार हुए हैं, उनकी सुरक्षा बेहद जरूरी है, साथ ही अपराधी के भी कुछ अधिकार हैं.”
SIT का किया गठन
तमिलनाडु सरकार ने वीरमणी के खिलाफ बच्चे के साथ रेप के मामले और उससे जुड़े दूसरे मुद्दों की जांच के लिए चार सदस्यों वाली एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है, जिसमें सभी महिला सदस्य हैं. 29 अगस्त को बच्चे के साथ रेप के मामले में वीरमणी के साथ शांति और महेंद्र सिम्हन की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ने के बाद ये टीम बनाई गई. इसके बाद, 22 सितंबर को पुलिस को जेम ग्रेनाइट्स के पूर्व कर्मचारी गणेशन के मोबाइल फोन पर इस मामले से जुड़ा एक वीडियो मिला, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.