खांसी की दवा को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किया निर्देश, बच्चों की मौत से मचा हड़कंप

मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप पीने के बाद बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया है. राजस्थान में दवा सुरक्षित पाई गई, लेकिन मध्य प्रदेश में 14 बच्चों की मौत के बाद कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री पर रोक लगाई गई है. जांच में इस सिरप में 48.6% डायथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया, जो जानलेवा है. DGHS ने 5 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न देने की सलाह दी है.

cough syrup
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खांसी की दवा पीने के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान में कई बच्चों की मौत के बाद हड़कंप मचा हुआ है. राजस्थान में मृतक बच्चों को मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के तहत मिली दवा दी गई थी. सरकार ने डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप की जांच की. सीकर, झुंझुनू, भरतपुर और अन्य जिलों से प्राप्त सैंपल की जब जांच हुई तो दवा के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई और सिरप में किसी भी प्रकार की खराबी की बात सामने नहीं आई. वहीं मध्य प्रदेश में सबसे अधिक बच्चों की मौत हुई है, जहां दवाओं की जांच की जा रही है.

इसी बीच केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से खांसी की दवाओं को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं और बताया गया है कि किन बच्चों को खांसी की दवाई नहीं देनी है. बच्चों को कफ सिरप देने को लेकर Director General of Health Services (DGHS) की तरफ से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.

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DGHS के मुताबिक, खांसी के लिए कफ सिरप 2 वर्ष तक के बच्चे को बिल्कुल नहीं देना है. वैसे 5 वर्ष तक के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए. 5 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को कफ सिरप मेडिकल जांच के बाद डॉक्टर की निगरानी में ही दिया जाना चाहिए. बच्चों को खांसी की दवा देने के समय मात्रा का सख्ती से पालन होना चाहिए. एक समय में बच्चों को कई दवाएं देने से बचना चाहिए.

मध्य प्रदेश सरकार ने छिंदवाड़ा में 14 बच्चों की मौत के बाद कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया. अधिकारियों ने बताया कि दवा के नमूनों में 48.6% डायथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया, जो एक अत्यधिक जहरीला पदार्थ है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि चेन्नई स्थित औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में सरकारी औषधि विश्लेषक द्वारा जांचे गए सिरप के नमूने को तमिलनाडु औषधि नियंत्रण निदेशालय ने “मानक गुणवत्ता” का नहीं पाया है.

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अधिकारियों के अनुसार, एहतियात के तौर पर स्थानीय प्रशासन ने सोमवार को ही कोल्ड्रिफ और एक अन्य कफ सिरप ‘नेक्सट्रो-डीएस’ की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था. कोल्ड्रिफ की जांच रिपोर्ट शनिवार को आ गई, जबकि नेक्सट्रो-डीएस की रिपोर्ट का इंतजार है. तमिलनाडु औषधि नियंत्रण अधिकारियों ने 2 अक्टूबर की अपनी रिपोर्ट में श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स, कांचीपुरम द्वारा निर्मित कोल्ड्रिफ सिरप के नमूने को मिलावटी घोषित किया, क्योंकि इसमें डायथिलीन ग्लाइकॉल (48.6% w/v) था, जो एक जहरीला पदार्थ है.

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