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Zorawar Tank : पहाड़ों पर दौड़ेगा, पानी में तैरेगा… जानिए भारत के 'जोरावर' की ताकत, जिसने उड़ाई ड्रैगन की नींद

भारतीय सेना ने 59 लाइट टैंक का ऑर्डर देने का प्लान तैयार किया है. हालांकि, सेना को कुल 354 ऐसे लाइट टैंक की जरूरत है. भारतीय सेना को 2027 तक यह टैंक मिलने की संभावना है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सूरत दौरे के दौरान एलएंडटी के प्लांट पहुंचकर भारतीय सेना के सबसे नए टैंक जोरावर के निर्माण कार्य का जायजा लिया. पूर्वी लद्दाख और LAC के ऊंचे, बर्फीले और दुर्गम इलाकों में चीनी सेना की हर गुस्ताखी का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत ने अपना अचूक हथियार तैयार कर लिया है. भारत का पूरी तरह स्वदेशी लाइट टैंक ‘जोरावर’ अब एलएसी पर गरजने के लिए बिल्कुल तैयार है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा ज्वाइंट रूप से बनाया यह टैंक भारतीय सेना को हिमालय की ऊंचाइयों पर अभूतपूर्व मारक क्षमता देगा. इसके सेना में शामिल होने की खबर मात्र से ही चीनी खेमे में खलबली मच गई है.

क्यों पड़ी ‘जोरावर’ जैसे हल्के टैंक की जरूरत?

साल 2020 में गलवान घाटी विवाद के बाद जब भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने आ गईं, तब भारत को पूर्वी लद्दाख की ऊंचाइयों पर अपने भारी-भरकम टी-90 और टी-72 टैंकों को तैनात करना पड़ा था. ये टैंक बेहतरीन हैं, लेकिन इनका वजन 45 से 50 टन के बीच होने के कारण इन्हें इतनी ऊंचाई पर तेजी से मूव करना और संकरे पहाड़ी रास्तों पर चलाना एक बड़ी चुनौती थी.

दूसरी तरफ, चीन ने सीमा पर अपने हल्के ‘टाइप 15’ स्टील्थ टैंक तैनात कर रखे थे, जो पहाड़ों पर तेजी से दौड़ सकते हैं. इसी सैन्य असंतुलन को खत्म करने और चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए भारत ने रिकॉर्ड समय 19 महीने में ‘प्रोजेक्ट जोरावर’ के तहत इस स्वदेशी लाइट टैंक को डिजाइन और निर्मित किया है.

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क्या हैं ‘जोरावर’ की खूबियां?

जोरावर टैंक को खास तौर पर ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से ऑपरेशन चलाने के लिए डिजाइन किया गया है. इस टैंक का वजन महज 25 टन के आसपास है. कम वजन होने के कारण इसे भारतीय वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे मालवाहक विमानों के जरिए बेहद कम समय में सीधे युद्ध क्षेत्र या एलएसी के फॉरवर्ड पोस्ट तक एयरलिफ्ट किया जा सकता है. हल्के वजन के बावजूद इसकी मारक क्षमता से कोई समझौता नहीं किया गया है. यह आधुनिक मिसाइलों, सटीक गोला-बारूद और ड्रोन-रोधी प्रणालियों से लैस है.

जोरावर टैंक में एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो युद्ध के मैदान में दुश्मनों के ठिकानों को पलक झपकते ट्रैक करने और सटीक निशाना लगाने में मदद करती है. यह टैंक न सिर्फ पहाड़ों पर दौड़ सकता है, बल्कि पैंगोंग त्सो जैसी गहरी झीलों और नदियों को भी आसानी से तैरकर पार करने में सक्षम है.

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कब मिलेगा सेना को?

भारतीय सेना ने 59 लाइट टैंक का ऑर्डर देने का प्लान तैयार किया है. हालांकि, सेना को कुल 354 ऐसे लाइट टैंक की जरूरत है. भारतीय सेना को 2027 तक यह टैंक मिलने की संभावना है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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