लद्दाख से बड़ी खबर है. उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने महज नौ महीने के कार्यकाल के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. कविंदर गुप्ता ने पिछले साल 18 जुलाई को पद की शपथ ली थी और वे लद्दाख के तीसरे उपराज्यपाल बने थे. यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब लद्दाख में विकास और संवैधानिक सुरक्षा को लेकर बहस जारी है. अभी तक इस्तीफे के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन यह खबर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है. कविंदर गुप्ता के अचानक इस्तीफे के बाद अब सबकी नजरें केंद्र सरकार पर टिकी हैं. लद्दाख जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए नए उपराज्यपाल के नाम की घोषणा जल्द ही की जा सकती है.

क्यों अहम है यह इस्तीफा?

जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता को लद्दाख की कमान एक महत्वपूर्ण समय पर सौंपी गई थी. उनके इस्तीफे ने प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है. उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता के कार्यकाल के दौरान लद्दाख में राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची की सुरक्षा और स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे. लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस जैसे संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाए, जिससे क्षेत्र में अशांति बढ़ी. हालांकि, इस्तीफे के पीछे के आधिकारिक कारणों का अभी पूरी तरह खुलासा नहीं हुआ है.

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इससे पहले बंगाल के राज्यपाल का इस्तीफा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले साढ़े तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अचानक पद से इस्तीफा दे दिया है. राज्यपाल के ओएसडी ने पुष्टि करते हुए कहा कि इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस इस्तीफे पर सोशल मीडिया पर अपनी हैरानी जताते हुए इसे एक गहरी चिंता का विषय बताया.

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