Karnataka: पूर्व सीएम बोम्मई को पुलिस ने हिरासत में लिया, कांग्रेस ने कहा- आसन पर हमला बर्दाश्त नहीं

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Basavaraj Bommai

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Karnataka: कर्नाटक पुलिस ने बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई सहित अन्य भाजपा नेताओं को हिरासत में ले लिया। बोम्मई 10 भाजपा विधायकों के निलंबन को लेकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। भाजपा ने विधायकों के निलंबन और पूर्व सीएम को हिरासत में लिए जाने को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। वहीं, बसवराज बोम्मई ने इसे लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया है।

कर्नाटक पुलिस बेंगलुरु के विधानसौदा पहुंची और विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पर बोम्मई को हिरासत में ले लिया। पुलिस अधिकारी उन्हें अपने साथ ले गये। कर्नाटक विधानसभा सत्र 3 जुलाई को शुरू हुआ और 21 जुलाई को समाप्त होगा।

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क्यों हुआ 10 भाजपा विधायकों का निलंबन

दरअसल, बुधवार को कर्नाटक विधानसभा ने सिद्धारमैया सरकार पर आईएएस अफसरों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। आरोप लगाया कि गठबंधन के नेताओं की सेवा में 30 से अधिक आईएएस तैनात कर दिए। इससे जनहित के काम नहीं हो सके। हंगामे के दौरान सदन में भाजपा के कुछ सदस्यों ने विधेयकों और एजेंडे की प्रतियां फाड़ दीं और उन्हें सभापति की ओर फेंक दिया। बीजेपी विधायक लंच ब्रेक दिए बिना सदन की कार्यवाही चलाने के स्पीकर के फैसले से नाराज थे। इसके बाद 10 विधायकों को पूरे सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया।

हम अधिकारों के लिए लड़ेंगे

बसवराज बोम्मई ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है। आज लोकतंत्र की हत्या हुई। 10 भाजपा विधायकों को छोटे से आंदोलन के लिए निलंबित कर दिया गया है। हम निलंबित विधायकों के अधिकार के लिए लड़ेंगे।

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निलंबित बीजेपी विधायकों में से एक यशपाल सुवर्णा ने कहा कि स्पीकर अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारे स्पीकर अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं। वह केवल एक पक्ष का पक्ष ले रहे हैं। सिद्धारमैया सरकार राज्य में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का दुरुपयोग कर रही है।

चेयर पर हमला ठीक नहीं

इस बीच, सत्तारूढ़ कांग्रेस ने कहा कि उन्हें (भाजपा विधायकों को) विरोध करने से कोई नहीं रोक रहा है, लेकिन आसन पर हमला करना सही नहीं है।

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कर्नाटक के गृह मंत्री डॉ जी परमेश्वर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हमने सदन में कुछ दिशानिर्देश, कुछ नियम बनाए हैं। सदन के नियम हैं। कोई भी उन्हें विरोध करने से नहीं रोकता है, लेकिन कुछ बुनियादी अनुशासन हैं जिनका उन्हें पालन करना होगा। अध्यक्ष पर हमला करना कुछ ऐसा है जो हम नहीं करते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है और हम अध्यक्ष से कुछ कार्रवाई करने की अपील करते हैं। अन्यथा, मुझे नहीं लगता कि हमारे सदन ठीक से चलेंगे।

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