देश पर 3 चक्रवाती तूफानों का खतरा मंडरा रहा है और अगले 3 महीने में करीब 6 राज्यों में तीनों तूफान तबाही मचा सकते हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक के लिए चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि उत्तर भारतीय महासागर में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में 3 उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनने वाले हैं और इन तीनों की तीव्रता 44 सालों के इतिहास में 83% ज्यादा रहने का अनुमान है. इसलिए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहना होगा और सरकारों को पहले से ही एहतियाती कदम उठाने होंगे.

40 साल का रिकॉर्ड तोड़ सकते चक्रवाती तूफान

इसरो की चेतावनी के अनुसार, 83 प्रतिशत से ज्यादा तीव्रता के साथ तीनों तूफानी तबाही मचा सकते हैं और 40 साल का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं. इसरो वैज्ञानिकों ने पिछले 40 साल के वेदर पैटर्न, हवाओं के पैटर्न और समुद्र के तापमान को स्टडी करने के बाद तीनों तूफानों का पता लगाया और सरकार को चेताया. ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश को इन चक्रवाती तूफानों से सबसे ज्यादा खतरा होगा. वहीं कर्नाटक, तामिलनाडु और केरल भी तूफान की चपेट में आएंगे. तूफान आने पर इन 6 राज्यों में भारी मूसलाधार बारिश होगी और नुकसान पहुंचाने वाली हवाएं चलने की संभावना है.

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क्या समुद्र तटों से भी टकराएंगे चक्रवाती तूफान?

इसरो की चेतावनी के बाद मौसम विशेषज्ञ कहते हैं कि चक्रवाती तूफानों का समुद्र तटों पर लैंडफॉल होगा या नहीं, इसके बारे में कहा नहीं जा सकता. क्योंकि अकसर उष्णकटिबंधीय तूफान समुद्र में रहते हैं और लैंडफॉल से पहले अपना रास्ता बदल लेते हैं, फिर कमजोर पड़ जाते हैं और फिर समाप्त हो जाते हैं. चक्रवात तूफान के रास्ते, तीव्रता और ताकत के बारे में भी पहले पता नहीं लगा सकते. जब ये बनते हैं, तभी वेदर एजेंसियां इनकी निगरानी कर सकती हैं. जब चक्रवाती तूफान शक्तिशाली होते हैं तो समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठती हैं और समुद्र भयानक जानलेवा हो जाता है.

हजारों लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं तूफान

शक्तिशाली चक्रवाती तूफान भीषण तबाही, तेज हवाएं, मूसलाधार बारिश लेकर आते हैं, जिससे तटीय इलाकों में पानी भर सकता है. बाढ़ आने से घर, खेत, सड़कें आदि सब डूबने से बुनियादी ढांचा तबाह हो सकता हैं. बिजली और यातायात सेवा ठप हो सकती है. और मछली पकड़ने वाले मछुआरों, शिपिंग करने वालों, कोस्ट गार्ड और नौसेना के लिए भी संकट पैदा हो सकता है. ऐसे में इसरो की पूर्व चेतावनी मिलने से राज्य सरकारों और प्रशासन को समय से पहले तैयारी का मौका मिला गया है. आपातकालीन टीमों को संवेदनशील इलाकों में भेजकर इवेक्यूएशंस (निकासी) किया जा सकता है.

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तूफानों का असर कई कारकों पर निर्भर करता

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवाती तूफानों का असर भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर अलग-अलग पड़ता है. वहीं असर इस बार पर निर्भर करता है कि चक्रवाती तूफान कहां बना, किस दिशा में उनका एंट्रेस है, कितना ताकतवर हुआ और कहां टकराया? इसलिए इसरो के द्वारा जिन राज्यों के लिए चेतावनी दी गई है कि वे तैयारी रखें, लेकिन इस चेतावनी को चक्रवाती तूफानों और उनके लैंडफॉल की पक्की भविष्यवाणी न समझें. ऑफिशियल वेदर अलर्ट और IMD की वेदर रिपोर्ट पर लगातार नजर बनाएं रखें और उसके अनुसार प्लान बनाएं.

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