राजनीतिक संकट टालने की कोशिश! NC में कलह के बीच नाराज विधायकों से मिले उमर और फारूक अब्दुल्ला

उमर अब्दुल्ला सरकार की स्थिरता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. हालांकि, किसी विधायक के इस्तीफे या पार्टी में औपचारिक टूट की घोषणा नहीं हुई है.

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नाराज विधायकों ने पहले ही स्पष्ट किया था कि उनकी नाराजगी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत नहीं है. (Photo: ANI)

जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) में कैबिनेट विस्तार और फेरबदल के बाद शुरू हुई अंदरूनी नाराजगी को दूर करने की कोशिशें तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में शुक्रवार को पार्टी के नाराज विधायकों के एक समूह ने श्रीनगर में पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की. मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में विधायकों ने अपनी शिकायतें और मांगें नेतृत्व के सामने रखीं. माना जा रहा है कि इस बातचीत का मकसद पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को खत्म करना, सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाना है.

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जानकारी के मुताबिक, बैठक में करीब 13 विधायक शामिल हुए. इससे पहले पार्टी के असंतुष्ट विधायकों की संख्या 18 से 25 तक बताई जा रही थी. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि नाराज विधायकों के समूह के सभी सदस्य इस बैठक में पहुंचे थे या नहीं. विधायकों ने कैबिनेट विस्तार के अलावा सरकार के कामकाज, पार्टी संगठन को मजबूत बनाने और जनसमस्याओं के समाधान के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों को अधिक अधिकार देने जैसे मुद्दे उठाए.

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हसनैन मसूदी के आवास पर बनी थी रणनीति

फारूक और उमर अब्दुल्ला से मुलाकात से पहले नाराज विधायकों ने गुरुवार देर शाम श्रीनगर में पंपोर के विधायक और पूर्व सांसद हसनैन मसूदी के आवास पर बैठक की थी. इस दौरान नेतृत्व के सामने उठाए जाने वाले मुद्दों और मांगों पर चर्चा हुई. बताया जा रहा है कि विधायकों ने अपनी शिकायतों और अपेक्षाओं को लेकर एक मांगपत्र भी तैयार किया था.

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इस समूह में जावेद मिर्चल, सज्जाद शफी उरी, गुलाम मोहिउद्दीन मीर, फारूक जान, बशीर अहमद वीरी, अब्दुल मजीद भट, फारूक अहमद शाह, मुबारक गुल, हसनैन मसूदी, नजीर अहमद गुरेजी, एजाज अहमद जान, जावेद इकबाल चौधरी, सैफुद्दीन भट और कैसर जमशेद लोन सहित कई नेता शामिल बताए गए.

बगावत नहीं, संगठन मजबूत करने की दलील

नाराज विधायकों ने पहले ही स्पष्ट किया था कि उनकी नाराजगी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत नहीं है. उनका दावा है कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस को मजबूत बनाने और सरकार को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने के लिए अपनी बात रख रहे हैं. इससे पहले पार्टी नेता सलमान सागर ने भी विवाद को ज्यादा तूल न देते हुए कहा था कि परिवार और पार्टी के भीतर छोटे-मोटे मतभेद बातचीत से सुलझाए जा सकते हैं.

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सरकार के बहुमत पर भी नजर

इस घटनाक्रम के बाद उमर अब्दुल्ला सरकार की स्थिरता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. हालांकि, किसी विधायक के इस्तीफे या पार्टी में औपचारिक टूट की घोषणा नहीं हुई है. ऐसे में फिलहाल इसे नेतृत्व और असंतुष्ट विधायकों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा और विशेष दर्जे से जुड़े मुद्दे भी व्यापक राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं. अब देखना होगा कि नेतृत्व विधायकों की मांगों पर क्या फैसला लेता है और पार्टी के भीतर जारी असंतोष कितना कम हो पाता है.

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