भारतीय नौसेना की ताकत में जल्द ही एक और बड़ा इजाफा होने जा रहा है. अगले महीने यानी अप्रैल 2026 के पहले हफ्ते में अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस तारागिरी (INS Taragiri) भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने जा रहा है. ये युद्धपोत प्रोजेक्ट-17A के तहत बनाए जा रहे नीलगिरी क्लास फ्रिगेट का चौथा जहाज है, जो नौसेना के पूर्वी बेड़े को और ज्यादा मजबूत बनाएगा. नेवी सूत्रों के मुताबिक, प्रोजेक्ट-17A के तहत कुल सात मॉडर्न फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं. इनमें से पांचवां युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरी भी साल 2026 के आखिर तक नौसेना में शामिल हो सकता है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोजेक्ट-17A के ये फ्रिगेट भारतीय नौसेना के सबसे आधुनिक और ताकतवर युद्धपोतों में गिने जाते हैं.

आईएनएस तारागिरी की खासियत

करीब 6,700 टन वजन वाले इस युद्धपोत का निर्माण अत्याधुनिक मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन तकनीक से किया गया है. इस जहाज को बनाने में 75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी यानी आत्मनिर्भर भारत के तहत बने उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को भी दर्शाता है. हथियारों की बात करें तो इस फ्रिगेट में कई एड्वांस वेपन सिस्टम लगाए गए हैं. इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल, 76 मिमी नौसैनिक तोप और पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो जैसे घातक हथियार शामिल हैं. इसके अलावा ये युद्धपोत हेलीकॉप्टर संचालन में भी सक्षम है और इसमें लगभग 225 नौसैनिकों की तैनाती की जा सकती है.

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नौसेना के लिए क्यों खास है 2026?

समुद्र के भीतर मौजूद खतरों से निपटने के लिए इस जहाज में HUMSA-NG सोनार सिस्टम लगाया गया है, जो पनडुब्बियों और बाकी समुद्री खतरों का पता लगाने में मदद करता है. वहीं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए इसमें अजंता और शक्ति सिस्टम लगाए गए हैं, जो दुश्मन के सिग्नल को पकड़ने और उन्हें जाम करने में सक्षम हैं. रक्षा सूत्रों का मानना है कि साल 2026 भारतीय नौसेना के लिए अहम साल साबित हो सकता है. इस साल नौसेना में कई नए जहाज शामिल होने वाले हैं, जिनमें अर्नाला क्लास एंटी-सबमरीन कॉर्वेट, एक बड़ा सर्वे पोत और डीप-सबमर्जेंस रेस्क्यू शिप आईएनएस निपुण भी शामिल है. इन सभी युद्धपोतों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत और निगरानी क्षमता पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी. रक्षा मंत्रालय का फोकस भी अब समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने और भविष्य के युद्धों के लिए नौसेना को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने पर है.

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