पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि रोक दी और नदी का पानी पाकिस्तान जाने से रोक दिया. अब पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने यह दावा करते हुए रोना रो रहा है कि सिंधु नदी का पानी रुक जाने से देश के कई गांवों में सूखा पड़ा है और लोग प्यासे मर रहे हैं. लेकिन भारत ने संधि और आतंकवाद को लेकर कड़ा रुख अपनाया हुआ है. साथ ही पाकिस्तान को दोटूक चेतावनी दे दी है कि पाकिस्तान अगर दो शर्तें मान ले तो ही उसे राहत मिलेगी और भारत पानी देकर किल्लत दूर कर देगा.
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आतंकवाद का साथ छोड़े तो मिलेगा सिंधु का पानी
सूत्रों के अनुसार, भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और पाकिस्तान को कह दिया है कि सिंधु जल संधि अब शायद ही अपने पहले वाले स्वरूप में फिर से लागू हो. भारत अब सिंधु जल संधि पर बातचीत में तभी रुचि लेगा, जब पाकिस्तान आतंकवाद की राह और आतंकियों का साथ छोड़ने के लिए राजी होगा. आतंकवाद से निपटने के लिए ठोस कदम उठाएगा. पाकिस्तान में आतंकवादी खुलेआम घूम रहे हैं. सार्वजनिक कार्यक्रमों में ऐसे नजर आते हैं, जैसे वहां के नागरिक हों और पाकिस्तान ऐसा होने दे रहा है.
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पाकिस्तान पर विक्टिम कार्ड खेलने का आरोप लगाया
भारत का कहना है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ एक्शन लेने की बजाय अंतरराष्ट्रीय समर्थन के लिए सिर्फ विक्टिम कार्ड खेल रहा है. लेकिन इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई की कोई वैल्यू नहीं है. सिंधु जल संधि के तहत पानी लेने के लिए 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' और न्यूट्रल एक्सपर्ट् के पास जाने से कोई फायदा नहीं है. पाकिस्तान ने जैसा किया है, वैसा ही फल वह भुगत रहा है. अगर पानी की इतनी ही जरूरत है तो पानी को जमा करने के लिए स्टोरेज सिस्टम क्यों नहीं बनाया?
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क्या है सिंधु जल संधि विवाद और वर्तमान स्थिति?
बता दें कि विश्व बैंक की मध्यस्थता के साथ 9 साल बातचीत करने के बाद सिंधु नदी के पानी का बंटवारा हुआ. भारत और पाकिस्तान ने 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि साइन की. समझौते के तहत भारत को पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज का पानी मिलता है, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी मिलता है. संधि के तहत भारत को उन पश्चिमी नदियों पर प्रोजेक्ट लगाने का अधिकार है, जो पाकिस्तान में बहने से पहले भारत में बहती है. लेकिन पाकिस्तान हमेशा से भारत के प्रोजेक्ट्स का विरोध करता आया है और सिंधु जल संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करता आया है.
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