भारतीय रेलवे ने ट्रेनों पर होने वाली पत्थरबाजी, सामान व केबल चोरी और पटरियों पर अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए हाई-टेक तरीका निकाला है. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) अब रेलवे ट्रैक, संवेदनशील यार्ड और स्टेशनों की निगरानी के लिए आसमान से ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. इस पहल से न केवल अपराधों पर रोक लग रही है, बल्कि स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन में भी बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है. ड्रोन की एक टीम 8 से 10 किलोमीटर तक के दायरे की लाइव निगरानी कर सकती है. ईस्ट कोस्ट रेलवे अपनी इस सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मार्च 2027 तक ड्रोनों की संख्या 11 से बढ़ाकर 22 करने जा रहा है.
रेल मंत्रालय के निर्देशों के तहत ईस्ट कोस्ट रेलवे (ECoR) ने अपने 284 स्टेशनों, 2,708 रूट किलोमीटर और 6,072 ट्रैक किलोमीटर के दायरे में 11 अत्याधुनिक ड्रोन तैनात किए हैं. इस सुरक्षा प्रणाली को ‘ड्रॉवक आई – ऑब्जर्वेशन, डिटेक्शन, प्रिवेंशन’ नाम दिया गया है. इन ड्रोनों को उड़ाने के लिए डीजीसीए (DGCA) से प्रमाणित 160 पायलटों की टीम तैयार की गई है. फिलहाल संबलपुर में 6, खुर्दा रोड में 4 और रायगड़ा डिवीजन में 1 ड्रोन तैनात है.
2026 में भरीं 3 हजार से ज्यादा उड़ानें
1 जनवरी से 15 सितंबर 2026 के बीच आरपीएफ ने तीनों डिवीजनों में कुल 3,033 ड्रोन उड़ानें संचालित की हैं. इनमें से 1,265 अभियान अति-संवेदनशील (RED कोड) श्रेणी के थे, जिनका मुख्य उद्देश्य तोड़फोड़, पटरियों पर पत्थरबाजी, केबल चोरी और आगजनी की घटनाओं को समय रहते रोकना था.
नाइट विजन और थर्मल कैमरों से लैस
जंगलों, सुरंगों, पहाड़ों और कोरापुट-रायगड़ा-किरंदुल जैसे सुनसान रेल मार्गों पर निगरानी के लिए इन ड्रोनों में नाइट विजन और थर्मल कैमरे लगाए गए हैं. ये रात के अंधेरे में भी संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ लेते हैं. पुरी रथ यात्रा 2026 के दौरान भीड़ नियंत्रण और ‘मेरी सहेली’ अभियान के तहत महिला यात्रियों की सुरक्षा में भी इन ड्रोनों ने बेहतरीन भूमिका निभाई है.