अगले महीने यानी जून 2026 में इंडियन नेवी के बेड़े में बहुत बड़ा इजाफा होने जा रहा है. सेना में एक साथ तीन लड़ाकू समुद्री जहाजों को शामिल किया जाएगा, जिसे शत प्रतिशत आत्मनिर्भर भारत के तहत तैयार किया गया है. सबसे खास बात ये है कि इन तीन जहाजों में स्टील्थ फ्रिगेट, एक एंटी सबमरीन वॉरशिप और एक समंदर में रिसर्च करने वाला जहाज है. ऑपेरशन सिंदूर के दौरान हिन्द महासागर में चीन की नेवी लगातार एक्टिव रही थी और अभी भी भारत की समुद्री सीमा के पास आकर अपनी खोखली ताकत को दिखाने की कोशिश में लगी रहती है. ऐसे में इंडियन नेवी का ये फैसला हिन्द महासागर में अपनी ताकत को मजबूत करने को लेकर एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

किस श्रेणी के हैं जहाज?

इंडियन नेवी में शामिल किए जाने वाले ये जहाज दुनागिरी, अग्रय और संशोधक हैं. इन्हें कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने तैयार किया है. नेवी सूत्रों ने न्यूज 24 को जानकारी देते हुए बताया कि 45,000 करोड़ रुपये की परियोजना 17ए के तहत पांचवां स्टील्थ फ्रिगेट दुनागिरी जून 2026 में इंडियन नेवी में शामिल हो जाएगा. इसके साथ ही एंटी सबमरीन वॉरशिप अग्रय और बड़े सर्वेक्षण पोत संशोधक को भी बेड़े में शामिल कर लिया जाएगा.

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आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान

पी-17ए यानी नीलगिरी श्रेणी युद्धपोत भारत के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम में 75 प्रतिशत देशी सामग्री लगाई गई है. आपको बता दें कि इसमें पांचवी पीढ़ी का एडवांस्ड आर्म्स, सेंसर और मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं. रिटायर्ड एडमिरल अनूप सिंह ने न्यूज 24 को विशेष जानकारी देते हुए कहा कि ये फ्रिगेट ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों, बराक-8 सतह से वायु में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम, एमएफ-स्टार निगरानी रडार और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं से लैस हैं. 149 मीटर लंबे इन युद्धपोतों का डिस्प्लेसमेंट 6,670 टन है, ये 28 समुद्री मील तक की स्पीड पकड़ सकते हैं और इनमें 225 क्रू हो सकते हैं.

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