रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज से दो दिन के लिए वियतनाम की यात्रा पर जा रहे है, वियतनाम में इनका कार्यक्रम 18 मई की शाम से लेकर 19 मई की शाम तक रहेगा इसके बाद ये दो दिन के लिए कोरिया गणराज्य की यात्रा पर रहेंगे यानी 19 मई की रात से लेकर 21 मई की शाम तक. बता दे की राजनाथ सिंह के इस दौरे का एकमात्र मकसद भविष्य के युद्ध के लिए खुद को मजबूत करने को लेकर माना जा रहा है. हिन्द महासगार में भारतीय सेना को मजबूत करने से लेकर मित्र देशों के साथ साझा तरीके से आतंकवाद के खिलाफ हल्ला बोलना है, सेना सूत्रों ने न्यूज 24 को बताया कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल डील होने की संभावना के साथ ही साउथ कोरिया के साथ एक बड़ा डिफेंस डील हो सकता है.

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वियतनाम के साथ बड़ी डील की संभावना

मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध को देखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एकमात्र टारगेट ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की बेचने को लेकर के है. क्योंकि इस डील पर पिछले 7 सालों से दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच बातचीत चल रही है. वियतनाम भी भारत से यह आशा रखता है कि समुद्री ताकत में उसके देश को भारत ज्यादा से ज्यादा मजबूत करें, यह बात खुद वियतनाम के प्रेसिडेंट टो लाम ने हाल में किये गए अपने भारत दौरे के वक्त कही थी. राजनाथ सिंह के वियतनाम के इस दौरे को बेहद अहम इसलिये भी माना जा रहा है कि ब्रह्मोस मिसाइल की डील अंतिम चरण पर है. बता दें कि इसकी अनुमानित कीमत करीब 5,800 करोड़ रुपये बताई जा रही है. अगर यह डील हो गया तो फिलीपींस, इंडोनेशिया के बाद वियतनाम ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन जाएगा. इसे पहले फिलीपींस ने 2022 में 375 मिलियन डॉलर की डील की थी. वहीं इंडोनेशिया ने इस साल 340 मिलियन डॉलर से ज्यादा की डील को अंतिम रूप दिया था.

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ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत

  • यह आवाज की रफ्तार से लगभग तीन गुना तेज उड़ान भर सकती है.
  • यह 290 किलोमीटर तक निशाना साध सकती है.

वियतनाम के लिए क्यों जरूरी है ब्रह्मोस डील?

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मेजर जनरल एसके सिंह के मुताबिक साउथ चीन सागर में वियतनाम का विवाद होते रहता हैं जिसे देखते हुए यह अपनी समुद्री सुरक्षा को ज्यादा से ज्यादा मजबूत करना चाहता है. इस वजह से टेक्निकल सपोर्ट करने की भी बात भारत कर रहा है, इस टेक्निकल सपोर्ट में सुखोई-30 फाइटर जेट और किलो क्लास पनडुब्बियों की मरम्मत और अपग्रेड शामिल है. वियतनाम ने ये सभी प्लेटफॉर्म पहले रूस से खरीदे गए थे. भारत इनके रखरखाव में मदद कर सकता है. भारत की कोशिश रक्षा सौदों को लंबे रणनीतिक साझेदारी में बदलने की है.

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रक्षा मंत्री वियतनाम के बाद क्यों जा रहे साउथ कोरिया?

बात करें, राजनाथ सिंह के साउथ कोरिया दौरे की तो सियोल में राजनाथ सिंह डिफेंस इंडस्ट्रीज और न्यू टेक्नोलॉजी पे चर्चा करेंगे. एक्स पर पोस्ट करके, रक्षा मंत्री ने कहा है कि उनके इस यात्रा का फोकस राजनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने और समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने, भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने पर चर्चा करेंगे.

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साल 2022 में राजनाथ सिंह की इस दौरे में 2030 के लिए भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी के एक संयुक्त विजन स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर किए गए थे. अपने वियतनाम दौरे में राजनाथ सिंह, पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती के  समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और सम्मान के प्रतीक के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. वही साउथ कोरिया की अपनी यात्रा के दौरान, राजनाथ सिंह कोरिया गणराज्य के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री  अह्न ग्यु-बैक के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की समीक्षा भी की जाएगी. रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (डीएपीए) मंत्री ली, योंग-चिओल से भी मुलाकात करेंगे और भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे.

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