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55 साल पुराने रडार होंगे रिटायर! सीमा पर भारत तैनात करेगा स्वदेशी 'सुपर रडार', 500 KM तक दुश्मन की खैर नहीं

वर्तमान में सेना के पास जितने भी रडार सिस्टम है वे लगभग 55 साल पुराने हैं, यानी 1970 के दशक के बने हुए है. इसलिए इन नए रडार सिस्टम का मकसद पुराने सिस्टम को बदलना और सेना की सर्विलांस कैपेसिटी को कई गुना बढ़ाना है.

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वर्तमान में हो रहे कई देशों के बीच युद्ध को देखते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने अपनी हवाई सुरक्षा को पूरी तरह से अपग्रेड करने का फैसला लिया है. इंडियन डिफेंस मिनिस्ट्री ने आत्मनिर्भर भारत के तहत डिफेंस सेक्टर के लिए सामान बनाने वाली स्वदेशी कंपनी के लिए लॉन्ग रेंज सर्विलांस रडार बनाने के लिए RFI यानी Request for Information को साझा किया है. सेना सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में सेना के पास जितने भी रडार सिस्टम है वे लगभग 55 साल पुराने हैं, यानी 1970 के दशक के बने हुए है. इसलिए इन नए रडार सिस्टम का मकसद पुराने सिस्टम को बदलना और सेना की सर्विलांस कैपेसिटी को कई गुना बढ़ाना है.

नए रडार सिस्टम में क्या खास?

भविष्य के युद्ध को देखते हुए जो नए रडार को सेना के बेड़े में शामिल करने का फैसला लिया गया है, उसमें कई तरह का बदलाव किया गया है, यानी दुश्मन जिस रणनीति से वार करने की कोशिश करेगा उसके गतिविधियों को तत्काल पड़कर अपनी रणनीतिओं से वार करना होगा.

सेना से मिली जानकारी के मुताबिक, मोबाइल तकनीक पर नए रडार को बनाया जाएगा. यानी जब और जिस हिसाब से जरूरत पड़े उसी हिसाब से रडार को कही भी तैनात करने की कैपिसिटी रखी जाएगी. जिस नए रडार की बात हो रही है उसे डीआरडीओ की तरफ से बनाया जाएगा और इनकी सबसे बड़ी ताकत होगी 4-डायमेंशनल AESA तकनीक और देसी GaN (Gallium Nitride) सेमीकंडक्टर, इस तकनीक से रडार ज्यादा ताकतवर, कम गर्म होने वाले और दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक हमलों से सुरक्षित होंगे.

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किसकी होगी इसकी ताकत

यह बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और स्टेल्थ फाइटर जेट तक को ट्रैक करने की ताकत रखेगा और लगभग 500 किलोमीटर तक कि निगरानी कर सकता है.

ऑपेरशन सिंदूर के दौरान ड्रोन की लड़ाई खास तौर पर देखी गई थी इसलिये नए ड्रोन की क्षमता को बेहद अहम माना जा रहा है. इसमें सबसे खास X-बैंड रडार होगा, जो छोटे ड्रोन, क्वाडकॉप्टर और ड्रोन स्वार्म जैसी चुनौतियों को पहचानने और ट्रैक करने में माहिर होगा.

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कहा-कहा काम कर सकता है?

भारतीय रक्षा मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, ये रडार हिमालय जैसे इलाकों में निगरानी कर सकता है, यह -40°C से लेकर +50°C तक के तापमान में भी 24 घंटे ऑपरेशन कर सकता है.

‘मेक इन इंडिया’ का जलवा

सेना के बेड़े में इस रडार के शामिल होने से इंडिया की एयर डिफेंस सिस्टम की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. भविष्य में यह लड़ाकू विमानों के साथ-साथ ड्रोन जैसे नए खतरों से निपटने में अहम रोल निभाएगा.

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