प्रशांत देव

देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो के एकाधिकार को तोड़ने के लिए अब सरकार हरकत में आ गई है. लंबे समय तक चुप रहने के बाद अब नींद से जागी सरकार ने भारतीय विमानन बाजार में तीन नई एयरलाइनों को एंट्री देने का फैसला किया है.

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जल्द ही शंख एयर, अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस भारत में अपनी उड़ान सेवाएं शुरू करने जा रही हैं. इसकी जानकारी केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू नानक ने ट्वीट के जरिए दी है.

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मंत्री का बयान

मंत्री ने कहा कि पिछले एक सप्ताह के दौरान भारतीय आकाश में नई उड़ान भरने की आकांक्षा रखने वाली एयरलाइनों- शंख एयर, अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस की टीमों से मुलाकात कर उन्हें प्रसन्नता हुई. उन्होंने बताया कि शंख एयर को पहले ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय से एनओसी मिल चुकी है, जबकि अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को इसी सप्ताह एनओसी प्रदान की गई है.

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वहीं, इस मामले में सरकार का कहना है कि उसकी नीतियों के चलते भारतीय विमानन क्षेत्र आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है. मंत्रालय लगातार प्रयास कर रहा है कि देश में अधिक से अधिक नई एयरलाइनों को बढ़ावा दिया जाए.

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उड़ान (UDAN) योजना के जरिए स्टार एयर, इंडिया वन एयर और फ्लाई 91 जैसी छोटी एयरलाइनों को क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करने का अवसर मिला है और आगे भी इस सेक्टर में बड़े विस्तार की संभावनाएं जताई जा रही हैं. लेकिन सवाल यहीं उठते हैं कि देश ने हाल ही में वो दौर भी देखा जब पहली बार हवाई सेवाएं लगभग पूरी तरह ठप हो गईं. यात्री बेहाल हुए, हजारों उड़ानें रद्द हुईं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचा. इस संकट की सबसे बड़ी वजह मानी गई इंडिगो की 70 फीसदी बाजार हिस्सेदारी.

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आरोप है कि सरकार द्वारा तय किए गए सुरक्षा नियमों का इंडिगो ने समय रहते पालन नहीं किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि पूरे देश में हवाई सेवाएं ठप पड़ गईं.

सरकार क्यों झुकी?

हालात इतने बिगड़ गए कि सरकार को अपने ही बनाए सुरक्षा नियमों में ढील देनी पड़ी ताकि सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त न हो जाए. यह भी आरोप लगे कि इंडिगो इतना प्रभावशाली हो चुका था कि जानबूझकर ऐसी स्थिति बनाई गई जिससे सरकार को झुकना पड़े और सरकार झुक गई.

सड़क से संसद तक हंगामा

बीते दिनों ये मामला सड़क से लेकर संसद तक गूंजा था. विपक्ष ने सरकार पर कॉर्पोरेट दबाव में काम करने के गंभीर आरोप लगाए और यात्रियों की सुरक्षा से समझौते का मुद्दा जोर-शोर से उठाया.

देर से ही सही, एक्शन में सरकार

लगातार दबाव के बाद गहरी नींद से जागी सरकार ने इंडिगो के खिलाफ सख्त रुख अपनाया. सरकार ने इंडिगो की 10 फीसदी उड़ानों में कटौती का आदेश दिया और अब नई एयरलाइनों को मैदान में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है.

आगे क्या?

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या तीन नई एयरलाइनों की एंट्री वाकई इंडिगो के एकाधिकार को तोड़ पाएगी? और क्या यात्रियों को बेहतर सेवा और सस्ते किराए का फायदा मिलेगा? देश की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं.