India Pakistan Dialogue: भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से थमे हुए आपसी संवाद को एक बार फिर शुरू करने के लिए देश की कई बड़ी हस्तियों ने पहल की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और आरजेडी सांसद मनोज झा समेत देश के करीब 100 प्रतिष्ठित नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को एक साझा खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में दोनों पड़ोसियों के बीच शांति बहाली और औपचारिक बातचीत को तुरंत बहाल करने की वकालत की गई है।

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शांति के लिए दिए गए ये बड़े सुझाव

इन प्रमुख नागरिकों की ओर से भेजे गए पत्र में दोनों देशों के रिश्तों को पटरी पर लाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। पत्र में मांग की गई है कि कारगिल-स्कर्दू मार्ग पर आम लोगों की यात्रा की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच कमर्शियल उड़ानों के लिए अपने-अपने हवाई क्षेत्र को फिर से खोला जाए और व्यापारिक रिश्तों को मजबूती देने के लिए 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा बहाल किया जाए। पत्र में करतारपुर साहिब कॉरिडोर के साथ-साथ पाकिस्तान स्थित शारदा पीठ को भी श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह खोलने और मीडियाकर्मियों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की मांग शामिल है।

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बातचीत ही एकमात्र रास्ता

खुले पत्र में तर्क दिया गया है कि युद्ध या सैन्य टकराव से कभी भी विवादों का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। इतिहास गवाह है कि बड़े से बड़े मुद्दों को भी अंततः बातचीत की मेज पर ही सुलझाया जाता है। नागरिकों के इस समूह का मानना है कि कश्मीर समेत भारत और पाकिस्तान के बीच जितने भी पुराने और जटिल विवाद हैं, उन्हें केवल आपसी संवाद और डिप्लोमेसी के जरिए ही हल किया जा सकता है।

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शुरू हुआ सियासी घमासान

भाजपा ने इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं से भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक उससे किसी भी तरह की बातचीत का सवाल ही पैदा नहीं होता। भाजपा ने इस पत्र में शामिल विपक्षी नेताओं को घेरते हुए इसे पाकिस्तान के प्रति नरम रुख दिखाने की कोशिश करार दिया है।

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