स्वीडिश थिंक-टैंक सिप्री की रिपोर्ट जारी की गई है, रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में भारत का सैन्य खर्च $92.1 बिलियन यानी 9,210 करोड़ तक पहुंच गया है. आपको बता दें कि अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी के बाद भारत का रक्षा मंत्रालय दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा सैन्य देश बन गया है जो इतनी रकम अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने के लिए खर्च कर रहा है.
न्यूज 24 को मिली जानकारी के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के लिए 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, रडार और मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट शामिल हैं. इसी खर्चे में डीआरडीओ चांदीपुर में रुद्रम-2 एयर-टू-सर्फेस मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है. ईरान और इजराइल के बीच जंग लगातार बढ़ते जा रही है दोने देश पिछे नहीं हट रहे है, दोनो देश एक दूसरे के उपर लगातार मिसाइल और ड्रोन से हमला कर रहे है.
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मिडिल ईस्ट की इस लड़ाई के कारण भारतीय रक्षा मंत्रालय पूरी तरह से अर्ल्ट मोड पर है और देश की सुरक्षा में कही से भी कोई कमी नहीं रह जाए इसके लिए पूरा रोड मैप भी तैयार किया गया है. सिप्री की रिपोर्ट की माने तो भारत का परमाणु बम बनाने के लक्ष्य में चीन के करीब पहुंचता जा रहा है. रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि अमेरिका और रुस के पास परमाणु बम अब गिनती के बराबर के बचे हुए है लेकिन अभी भी ये दोनों देश दुनिया के सामने सबसे शक्तिशाली बनकर है क्योंकि अभी भी ये दोनों देश दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु बम रखने वाले देश हैं.
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स्वीडिश थिंक-टैंक सिप्री की दिए गए ताजा जानकारी के मुताबिक जनवरी 2026 तक चीन ने अपने परमाणु हथियारों के भंडार में 20 वॉरहेड और तैयार कर लिया है जिसके बाद चीन के पास इसकी संख्या 620 हो गई, साल 2025 में यह संख्या 600 थी.
स्वीडिश थिंक-टैंक सिप्री के मुताबिक किन देशों के पास कितने परमाणु हथियार है न्यूज 24 सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहा है.
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रूस के पास 2025 में 5459 परमाणु हथियार थे जबकि 2026 में उसके पास 5420 परमाणु हथियार हो गये हैं. अमेरिका के पास 2025 में 5177 परमाणु हथियार थे जबकि 2026 में उसके पास 5 हजार 42 न्यूक्लियर वारहेड हैं. तीसरे स्थान पर चीन है जिसके पास 2025 में 600 न्यूक्लियर वारहेड थे और 2026 में उसके पास 620 परमाणु हथियार हो गये हैं. ब्रिटेन पास 2025 की तरह 2026 में भी 225 परमाणु वारहेड हैं.
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इसके बाद भारत का नंबर आता है जिसके पास 2025 में 180 परमाणु हथियार होने की बात कही गई थी और एक साल में भारत ने 10 परमाणु बम और बनाए हैं और अब भारत के पास 190 परमाणु बम हो गये हैं. बात अगर पाकिस्तान की करें तो पिछले एक साल में पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. 2025 में भी उसके पास 170 न्यूक्लियर हथियार थे और 2026 में भी उसके पास 170 न्यूक्लियर हथियार होने का ही अनुमान लगाया गया है.
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सिप्री रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को तेजी से आधुनिक और बड़ा बना रहा है, सिप्री का अनुमान है कि जनवरी में चीन ने ऑपरेशनल फोर्स के साथ तैनात अपने न्यूक्लियर वॉरहेड की संख्या बढ़ाकर लगभग 34 कर दी है जो 2025 में 24 थी. रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि जनवरी तक चीन के पास जमीन से लॉन्च होने वाली मिसाइलों के लिए 775 साइलो थे जिनमें इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर की संख्या रूस या अमेरिका से ज्यादा थी और इस दशक के आखिर तक चीन के ICBM का भंडार इन दोनों देशों के बराबर हो सकता है. सिप्री के मुताबिक भले ही 2030 तक चीन के पास 1000 से ज्यादा परमाणु हथियार हो जाएं फिर भी यह रूस या अमेरिका के मौजूदा जखीरे का सिर्फ एक-चौथाई ही होगा.