मिडिल ईस्ट जंग के बीच भारत की संसद में सोमवार से बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हुआ। इस दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने मिडिल ईस्ट के हालात पर अपना बयान दिया। राज्यसभा में बयान देने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर के उठने पर विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताई। विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। हंगामे के बीच जयशंकर ने बयान दिया।

जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि प्रधानमंत्री उभरते घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालय प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं। कहा कि हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया था। हम अब भी मानते हैं कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लेना चाहिए।

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विदेश मंत्री जय शंकर ने कहा कि हालात बिगड़े तो प्रधानमंत्री ने स्वयं पश्चिम एशिया की हालत पर नजर रखी और संबंध मंत्रालयों को निर्देशित किया। पश्चिम एशिया में हालत खराब हो गए हैं और नागरिक जीवन के साथ-साथ आर्थिक कार्य रुक गए हैं। हमारे करीब एक करोड़ लोग पश्चिम एशिया में काम करते हैं। हम अपनी ऊर्जा ज़रूरतें भी वहां से पूरी करते हैं। हमारा व्यापार भी पश्चिम एशिया पर अच्छे स्तर पर है।

कहा कि सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति का पिछली लड़ाई से ही आकलन कर रही है। समय पर एडवाइजरी की जाती रही है। पश्चिम एशिया में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा रहा है। तेहरान से हटाकर छात्रों और pilgrims को दूसरी जगह ले जाया गया है। प्रधानमंत्री ने ज़्यादातर सम्बद्ध खाड़ी देशों के राष्ट्रध्यक्ष और प्रधानमंत्रियों से बात की है ताकि भारतीयों को साहूलियतें दिलाई जा सकें।

विदेश मंत्री ने बताया कि 67000 नागरिकों को अभी तक भारत लाया जा चुका है। ईरान से संपर्क इस वक़्त ज़रा मुश्किल है हालांकि मैंने विदेश मंत्री Araghchi से बात की है। ऊर्जा जरूरतें के संदर्भ मे कहना है कि सरकार के लिए भारतीयों का हितसाधन ही सबसे महत्वपूर्ण है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि हमने दो भारतीय नाविकों (व्यापारिक जहाजों) को खो दिया है, और एक अभी भी लापता है। कहा कि संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है और क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में काफी गिरावट आई है। संघर्ष अन्य देशों में भी फैल गया है और विनाश बढ़ता जा रहा है। सामान्य जीवन और गतिविधियां स्पष्ट रूप से प्रभावित हो रही हैं।

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