Semi High-Speed Rail: भारत में पहली बार 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली सेमी हाई-स्पीड रेल लाइन का रास्ता साफ हो गया है. केंद्र सरकार ने बुधवार को अहमदाबाद-धोलेरा सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना को हरी झंडी दे दी है. लगभग 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाली यह 134 किलोमीटर लंबी डबल रेल लाइन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगी. इस प्रोजेक्ट को अगले पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह रेलवे का एक बिल्कुल नया मॉडल होगा. इसके तैयार होने पर भारत को ऐसा रेल कॉरिडोर मिलेगा जो बुलेट ट्रेन से कम खर्चीला होगा लेकिन मौजूदा ट्रेनों के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज और आधुनिक होगा.
34 मिनट में तय होगा घंटों का सफर
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी गति है. ट्रेन की डिजाइन स्पीड 220 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है जबकि इसे 200 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति पर चलाया जाएगा. वर्तमान में अहमदाबाद के सरखेज से धोलेरा तक सड़क मार्ग से जाने में कई घंटे लग जाते हैं लेकिन इस नई रेल लाइन के शुरू होने के बाद यह सफर महज 34 मिनट में सिमट जाएगा. यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा. इससे न केवल उद्योगों को फायदा होगा बल्कि रोजाना काम के सिलसिले में आने-जाने वाले लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी. यह रेल लाइन धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन को देश के आर्थिक नक्शे पर मजबूती से जोड़ेगी.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें: MEMU Train: फरीदाबाद से पुरानी दिल्ली जाना होगा अब और आसान! जल्द शुरू होगी नई मेमू ट्रेन, टाइम टेबल तैयार
---विज्ञापन---
स्मार्ट सिटी और इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ाव
सरकार धोलेरा को एक ग्रीनफील्ड स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी के रूप में विकसित कर रही है. यह नई रेल लाइन वहां बनने वाले अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, बड़ी औद्योगिक इकाइयों और लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर को सीधे जोड़ेगी. इस प्रोजेक्ट से लगभग 284 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और करीब पांच लाख लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा. प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत तैयार किए जा रहे इस कॉरिडोर का मकसद सड़क, रेल और हवाई मार्ग को एक साथ जोड़ना है. इसके निर्माण कार्य से क्षेत्र में रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे. यह रेल लाइन भविष्य की अन्य सेमी हाई-स्पीड परियोजनाओं के लिए एक रोल मॉडल के रूप में काम करेगी.
---विज्ञापन---
पर्यावरण को लाभ और 2030 तक पूरा होगा लक्ष्य
यह परियोजना केवल तकनीक और रफ्तार के मामले में ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी काफी अहम है. इस रेल लाइन के शुरू होने से हर साल करीब 48 लाख लीटर तेल की बचत होने का अनुमान है. साथ ही इससे दो करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा जो लगभग दस लाख पेड़ लगाने के बराबर प्रभाव पैदा करेगा. सरकार ने इस महत्वकांक्षी योजना को साल 2030-31 तक पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा है. अश्विनी वैष्णव के अनुसार यह कदम गुजरात के औद्योगिक और निवेश क्षेत्र को एक नई गति देगा. बुलेट ट्रेन के बाद अब सेमी हाई-स्पीड रेल के जरिए भारत अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को दुनिया के बेहतरीन देशों की कतार में खड़ा करने के लिए तैयार है.
---विज्ञापन---
---विज्ञापन---