10 साल बाद बिछड़े मां-बेटे का मिलन, हिंदू बन जी रहा था मुस्लिम युवक, जानें किसने-कैसे मिलवाया?

Mother Son Emotional Reunion: 10 साल पहले बिछड़ा युवक अपनी मां से मिला तो सब भावुक हो गए। युवक ने अपनी 10 साल की जिंदगी के बारे में बताया है कि वह कहां रहा और कैसे रहा? आइए जानते हैं कि युवक अपने असली परिवार से कैसे मिला?

Mohammad Khalil With Mother Sara

अपनी मां सारा के साथ मोहम्मद खलील।

Hyderabad Son Emotional Reunion With Mother: हैदराबाद में पैदा हुआ एक युवक अचानक गायब हो गया था, लेकिन 10 साल बाद उसे अपना परिवार फिर मिल गया। वह मुस्लिम परिवार का लड़का है, लेकिन 10 साल से वह हिंदू परिवार में उनका बेटा बनकर जी रहा था। खलील से वह अल्ताफ और फिर अभिनव बना, लेकिन आधार कार्ड ने उसे अपने परिवार से मिलवाया।

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हालांकि अब उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और अपनी असली पहचान पाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा, क्योंकि पिछले 10 साल में उसके जरूरी दस्तावेज बन चुके हैं और उन दस्तावेजों में उसका नाम अभिनव है, जबकि वह असल में खलील है। इसलिए उसे अपने दस्तावेज बदलवाने होंगे। सभी में अपना नाम अभिनव से खलील कराना होगा।

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साल 2014 में कोई बहलाकर ले गया था साथ

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कहानी हैदराबाद के 22 वर्षीय युवक मोहम्मद खलील गोरी की है। वह 12 साल की उम्र में गायब हो गया था। खलील की मां सारा ने बताया कि साल 2014 में खलील को उसके चचेरे भाई के साथ कुछ डॉक्यूमेंट्स की फोटोकॉपी कराने के लिए भेजा था, लेकिन खलील ने अपने चचेरे भाई को घर भेज दिया और कहा कि वह बाद में आएगा।

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उसके बाद घंटे, दिन, हफ्ते, महीने और साल बदल गए, लेकिन खलील वापस नहीं आया। सारा पिछले 10 साल से अपने बेटे को तलाश रही थी और वह तलाश अब पूरी हुई। वहीं खलील ने बताया कि उसे बस इतना याद है कि वह दिल्ली की ट्रेन में था और उसके साथ एक आदमी था, जिसने उसे बताया कि उसका नाम अल्ताफ है। इसके बाद वह उसके साथ ही रहने लगा।

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हिंदू परिवार ने गोदकर लेकर दिया था नया नाम

खलील ने बताया कि अचानक उस शख्स से साथ छूट गया और किसी ने उसे गाजियाबाद के एक आश्रय गृह में पहुंचा दिया। यहां से 3 साल पहले उसे कानपुर के एक हिंदू परिवार ने गोद लिया और उन्होंने उसका नाम अभिनव सिंह रखा। वह स्कूल गया, लेकिन ज्यादा दोस्त नहीं थे। ज्यादातर समय पढ़ाई में या अपनी मां के काम में मदद करने में बिताता था।

नए परिवार में एक बहन मिली, जिसका स्ट्रेसबस्टर बना, क्योंकि जब भी उसका मूड खराब होता था। वह सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रही थी, लेकिन तैयारी करते हुए तनावग्रस्त रहती थी तो उसका मनोरंजन करके तनाव दूर करता था। बेशक अपने असली परिवार और परिजनों के बीच आ गया हूं, लेकिन उस परिवार और बहन को कभी भूल नहीं पाऊंगा।

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आधार कार्ड बनवाते समय मिला पुराना रिकॉर्ड

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खलील ने बताया कि जब उसे दत्तक माता-पिता ने उसका आधार कार्ड बनवाने की कोशिश की तो बायोमीट्रिक्स रिकॉर्ड में उसका प्रोफाइल पहले से दर्ज मिला। यहां से उसकी असली पहचान की खोज शुरू हुई। मामला हैदराबाद तक पहुंचा और 1 दिसंबर को खलील को 2 ऐसे लोगों से मिलवाया गया, जिनसे वह कभी नहीं मिला था।

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वे उसके बायोलॉजिकल मां और भाई थे। हालांकि खलील उन्हें पहचान नहीं पाया, लेकिन उनके पास खलील के बचपन की तस्वीरें, स्कूल के रिकॉर्ड और आधार कार्ड भी भी था। यहां पता चला कि उसका असली नाम खलील है, अभिनव नहीं। फिर दत्तक परिवार ने उसे उसके असली परिवार के हवाले कर दिया। आधार कार्ड के अनुसार ही उसकी असली उम्र 22 साल है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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