पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्थिति पर विस्तार से बयान दिया और सरकार की प्राथमिकताओं को साफ किया. उन्होंने कहा, ‘सरकार संवेदनशील भी है, सतर्क भी है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है.’ यह बयान मौजूदा संकट में सरकार के समग्र दृष्टिकोण को रेखांकित करता है.
ऊर्जा सुरक्षा पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने Strait of Hormuz का जिक्र किया और कहा कि भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और उर्वरक इसी मार्ग से आते हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि युद्ध के बाद यहां से जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है, लेकिन साथ ही भरोसा दिलाया कि “इसके बावजूद हमारी सरकार का प्रयास रहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो.’
प्रधानमंत्री ने साफ किया कि सरकार की प्राथमिकता देश में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखना है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि काला बाजारी और जमाखोरी पर कड़ी नजर रखी जा रही है और ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
एलपीजी सप्लाई को लेकर उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में ‘सरकार घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता दे रही है और देश में एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है.’
संकट से निपटने की तैयारियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों में देश ने रणनीतिक भंडारण पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का Strategic Petroleum Reserve है और इसे और बढ़ाने की दिशा में काम चल रहा है.
मानवीय पहलू पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जब से यह युद्ध शुरू हुआ है, तब से ही प्रभावित क्षेत्रों में हर भारतीय को जरूरी मदद दी जा रही है.’ उन्होंने यह भी बताया कि अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है.
कूटनीतिक प्रयासों पर उन्होंने कहा, ‘मैंने खुद पश्चिम एशिया के ज्यादातर राष्ट्राध्यक्षों के साथ बात की है और सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है.’
प्रधानमंत्री ने संसद से अपील करते हुए कहा कि ‘यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए.’ हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्थिति गंभीर है. ‘दुर्भाग्य से इस दौरान कुछ लोगों की मृत्यु हुई है और कुछ लोग घायल हुए हैं, उनके परिवारों को हर संभव मदद दी जा रही है.’
प्रधानमंत्री के बयान से साफ है कि सरकार इस संकट को तीन स्तरों पर संभालने की कोशिश कर रही है—ऊर्जा, भारतीयों की सुरक्षा और कूटनीतिक सक्रियता. होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते खतरे के बीच सप्लाई चेन को स्थिर रखना सबसे बड़ी चुनौती है. साथ ही, विदेशों में बसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना और उनकी मदद करना एक बड़ा मानवीय और राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है.
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का संदेश यह है कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और हर स्तर पर सक्रिय है. लेकिन यह भी स्पष्ट है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा चलता है, तो भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियां और गहरी हो सकती हैं.
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