कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों ने नीट पेपर लीक के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. छात्रों की मांगों के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. नीट पेपर लीक को लेकर सीजेपी प्रोटेस्ट के बाद सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया था, लेकिन आज (27 जुलाई) सुनवाई के पहले ही दिन सीबीआई के वकील कोर्ट नहीं पहुंच सके. जिसकी वजह से कोर्ट ने मामले की सुनवाई को अगली तारीख 3 अगस्त तक स्थगित कर दिया है.
आरोपियों की जमानत याचिका पर होनी थी सुनवाई
सोमवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट में आरोपी विकास और दिनेश बिवाल की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई होनी थी, हालांकि CBI की ओर से कोई वकील मौजूद नहीं होने के कारण इन याचिकाओं पर भी बहस नहीं हो सकी. अदालत ने माना कि सीबीआई वकील की अनुपस्थिति में मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाना संभव नहीं है. अब उम्मीद की जा रही है कि अगली सुनवाई तक लोक अभियोजक की नियुक्ति पूरी कर ली जाएगी, जिससे मामले की सुनवाई बिना किसी व्यवधान के आगे बढ़ सके.
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प्रधानमंत्री मोदी ने दिलाया भरोसा
गौरतलब है कि NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुए थे. दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों ने कई दिनों तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर अपना आंदोलन जारी रखा. प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से वीडियो संदेश में कहा था कि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए व्यापक कदम उठा रही है. उन्होंने भरोसा दिलाया था कि जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है और ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाएगी. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि सरकार परीक्षा संबंधी अपराधों पर लगाम लगाने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान लागू करने की दिशा में काम कर रही है.
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