सोचिए जब किसी बूढ़े माता-पिता को अपने ही बच्चे के लिए मौत मांगनी पड़े, तो वो पल ही कितना दर्दनाक होगा. बता दें कि यह मामला गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा से जुड़ा हुआ है. जिस बेटे को माता-पिता ने बेहद लाड-प्यार से पाला, इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन दिलाया. बेटा भी टॉपर बनकर ऊंचाईयों को छूने के लिए तैयार था, लेकिन एक हादसे ने उसे इस हाल में पहुंचा दिया कि उसके ही मां-बाप को अपने बेटे के लिए इच्छा मृ्त्यु की मांग करनी पड़ी.
वहीं, हरीश के पिता ने कहा कि अब वह बेटे को दर्द से मुक्ति दिलाना चाहते हैं, जो 13 साल से बिस्तर पर है और उसके ठीक होने की भी सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं.
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एक दशक से अधिक समय तक बिस्तर पर समय बिताने के बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. एससी ने हरीश राणा के लिए 'पैसिव यूथेनेशिया' (निष्क्रिय इच्छा मृत्यु) को मंजूरी दे दी है. लंबे समय से हरीश राणा के माता-पिता अपने बेटे के लिए इच्छा मृत्यु की मांग कर रहे थे और ये मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था.
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वहीं, बुधवार को जब कोर्ट ने उनकी अर्जी को मंजूरी दी तो उसके बाद से ही पूरी सोसाइटी में गमगीन माहौल है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने फैसला सुनाया, जो न्यायालय के 2018 के 'कॉमन कॉज' निर्णय (जिसे 2023 में संशोधित किया गया था) पर आधारित है, जिसमें गरिमा के साथ मरने को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई थी.
हम चाहते हैं कि अब बेटे को मुक्ति मिले- हरीश के पिता
हरीण के पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आभार जताया. इस दौरान उन्होंने कहा कि इस फैसले से भारत में हजारों ऐसे लोगों को दर्दनाक जीवन से मुक्ति मिलेगी, जो हरीश जैसा जीवन जी रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं और मेरी पत्नी बूढ़े हो रहे हैं. हमारा पूरा परिवार लंबे समय से हरीश की सेवा कर रहा है, लेकिन अब हम चाहते हैं कि हमारे बेटे को इससे मुक्ति मिले.
उन्होंने कहा कि हमने न्यायालय का रुख तब किया जब हमें एहसास हुआ कि हमारे बेटे कि स्थिति लाइलाज और असाध्य है. जैसा कि आप कल्पना कर सकते हैं कि यह हमारे परिवार के लिए एक बहुत ही कठिन फैसला है, लेकिन हम हरीश के सर्वोत्तम हित में काम करना चाहते हैं.
इस तरह हरीश त्यागेंगे अपना शरीर
अशोक राणा ने बताया कि डॉक्टरों की निगरानी में हरीश को एम्स ले जाया जाएगा. जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका फूड पाइप निकाला जाएगा. फिर पानी के सहारे उसे रखा जाएगा और फिर प्रभु इच्छा से जब हरीश प्राण त्याग देता तो हरीश के पार्थिव शरीर को गाजियाबाद लाकर सम्मान से उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
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टॉपर था हमारा बेटा, रोते हुए बोले पिता
हरीश के पिता अपनी बात कहते हुए कई बार भावुक हो गए. इस दौरान उन्होंने हरीश के विद्यार्थी जीवन को भी याद किया. उन्होंने बताया कि उनका बेटा हरीश चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है था, वह टॉपर था. 20 अगस्त 2013 को उसके साथ हादसा हुआ था.
हरीश के अलावा एक बेटा और बेटी
हरीश के पिता ने बताया कि परिवार में पति-पत्नी के अलावा उनके दो बेटे और एक बेटी है. बेटी की शादी हो चुकी है. छोटा बेटा भी परिवार के साथ मिलकर हरीश की सेवा करता है.