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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अब तक कितनी बार लाया गया रिमूवल नोटिस? जानिए क्या है पूरा विवाद और CEC को हटाने की प्रक्रिया

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रिमूवल मोशन को लेकर क्या है पूरा विवाद? जानिए कितने नोटिस आए और CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या कहती है.

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव: CEC को कैसे हटाया जाता है? (Image- AI Generated)

इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी विवाद काफी बढ़ गया है. मामला अब संसद में उन्हें पद से हटाने की मांग तक पहुंच चुका है. विवाद उस समय और तेज हो गया, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के अंदर ही कुछ फैसलों को लेकर मतभेद सामने आने की बात कही गई. रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं. रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग फिर तेज कर दी है. दोनों सदनों में नया रिमूवल मोशन लाने की तैयारी की खबर भी सामने आई है. लेकिन यहां सवाल उठता है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अब तक कितनी बार ऐसा प्रस्ताव लाया जा चुका है? इनमें से कितने खारिज हुए और कौन-सा अभी लंबित है? और सबसे जरूरी बात आखिर मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया कैसे जाता है?

अब तक कितने रिमूवल नोटिस आए?

ज्ञानेश कुमार के मामले में अब तक तीन रिमूवल नोटिस संसद में दिए जा चुके हैं. इनमें से मार्च में लोकसभा और राज्यसभा में दिए गए दोनों नोटिस खारिज हो चुके हैं, जबकि 24 अप्रैल को राज्यसभा में दिया गया तीसरा नोटिस अभी लंबित है.सबसे पहला नोटिस 12 मार्च को लोकसभा और राज्यसभा में लाया गया. राज्यसभा वाले नोटिस पर 63 सांसदों और लोकसभा वाले नोटिस पर 130 सांसदों के हस्ताक्षर थे. लेकिन, 6 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इसको खारिज कर दिया. इसके बाद 24 अप्रैल 2026 को विपक्ष ने राज्यसभा में एक नया नोटिस दिया. इस बार इसमें 73 सांसदों के हस्ताक्षर थे और ज्ञानेश कुमार पर नौ आरोप लगाए गए. रिपोर्टों के मुताबिक यह अभी राज्यसभा के सभापति के पास लंबित है.

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ऐसा क्या सामने आया?

23 सितंबर को सामने आई इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयोग के अंदर हुई बातचीत और लिखित आपत्तियों के आधार पर बताया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने आरोप लगाया कि उन्हें कुछ फैसलों की जानकारी नहीं थी. आपत्तियों में नए वोटरों को जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने और फॉर्म-6 में किए गए बदलाव जैसे मुद्दे शामिल थे. कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन कदमों को “अवैध” और “गैरकानूनी” तक बताया. यही रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग फिर तेज कर दी और अब नए रिमूवल मोशन की तैयारी की बात सामने आई है.

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CEC को हटाने की प्रक्रिया कैसे शुरू होती है?

सबसे पहले संसद में रिमूवल मोशन का नोटिस दिया जाता है. इसके लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं. नोटिस लोकसभा में स्पीकर और राज्यसभा में सभापति के पास जाता है. वे यह तय करते हैं कि नोटिस को स्वीकार करना है या उसे खारिज करना है. अगर नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है, तो आगे तीन सदस्यों की जांच कमेटी बनाई जाती है. इसमें सुप्रीम कोर्ट के एक जज, किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक जाने-माने कानून विशेषज्ञ शामिल होते हैं. कमेटी आरोपों की जांच करती है और संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका भी मिलता है. इसके बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट देती है. अगर आरोप साबित होते हैं, तो प्रस्ताव संसद में आगे बढ़ता है.

संसद में पास होने के बाद क्या होता है?

प्रस्ताव को लोकसभा और राज्यसभा में पास होना जरूरी है. प्रस्ताव को सदन में वोट करने वाले सांसदों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पास होना होता है. दोनों सदनों से प्रस्ताव पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है. इसके बाद राष्ट्रपति CEC को पद से हटाने का आदेश जारी करते हैं. भारत में अब तक किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को इस पूरी प्रक्रिया के जरिए पद से नहीं हटाया गया है. ऐसे में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रही यह पूरी मशक्कत इस संवैधानिक प्रक्रिया को एक बार फिर चर्चा में ले आई है.

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